अपनी मेहनत के दम पर बंजर जमीन पर ऊगा दिया सोना
February 18th, 2019 | Post by :- | 329 Views

अपनी मेहनत के दम पर बंजर जमीन पर ऊगा दिया सोना
बंजर भूमि पर जैविक विधि से खेती कर सर्वश्रेष्ठ हल्दी उगा प्रदेश के पहले टर्मरिक मैन बने कर्नल पीसी राणा
देहरा, 18 फरवरी । अपनी मेहनत के  दम पर पूरे जहां पर छा जाना है, देश की मिट्टी में अपना पसीना मिला इस सोने से फिर देश का नाम चमकाना है।।
देश का परचम पूरे जहां में अपनी मेहनत के दम पर फहराने  घीण पंचायत के सोहरन गांव के कर्नल पीसी राणा ने ठान ली है। कर्नल राणा ने अपनी बंजर जमीनों  की मिट्टी पर मेहनत का पसीना बिखरा यहां जैविक हल्दी रूपी सोने को पैदा कर एक बेमिसाल करिश्मा कर दिखाया है। पीसी राणा ने इस हल्दी का कांगड़ा वैली टर्मरिक के नाम से पेटेंट करा कर अपना नाम प्रदेश के  इतिहास में पहले टर्मरिक मैन के रूप में  लिखवाने में कामयाबी हासिल की है। कर्नल राणा की हल्दी पूरी तरह जैविक है। इसका प्रमाणपत्र सरकार ने जारी किया है। साथ ही इस हल्दी में स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण कुकुमिन ऑयल की मात्रा भी साढ़े पांच प्रतिशत है। राणा बताते हैं कि इंडोनेशिया की हल्दी जिसमे कुकुमिन आयल की मात्रा विश्व में सबसे ज्यादा है, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अति उत्तन मानी जाती है। राणा ने बताया कि  वह अब मेघा प्रजाति की हल्दी का बीज तैयार कर रहे हैं । एवम इस हल्दी को कारियो एवम सोलर ड्रायर जैसी अति आधुनिक विधियों को अपना शीघ्र ही वह अपनी हल्दी को अर्न्तराष्ट्रीय मापदण्डों के अनुसार बना देंगे। इस हल्दी में कुकुमिन ऑयल 7 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। अब उनका स्वप्न यहां की हल्दी को इंडोनेशिया की हल्दी से सर्वश्रेष्ठ बना कर सारे जहां में छा जाने का है। राणा ने बताया कि उनकी आर्गेनिक हल्दी की मुंबई सहित अन्य तमाम बड़े शहरों में काफी मांग है और उनकी हल्दी इन शहरों में साढ़े चार सौ रुपए प्रति किलो आसानी से बिक रही है।

सफलता की यह कहानी कांगड़ा जिला के एक छोटे से गांव सोहरन के रहने वाले रिटायर्ड कर्नल पीसी राणा की है, जो आज हल्दी की खेती करते हुए समाज में एक अलग पहचान बना चुके हैं।

कर्नल पीसी राणा ने  ढलती उम्र के बावजूद खेतीबाड़ी से जुड़ने का जोखिम उठाया और महज 4 साल में हल्दी की खेती में बुलंदियों को छुआ। उनके अनुसार आज कोई भी नौजवान खेती से जुड़ना नहीं चाहता और जो थोड़े बहुत जुड़े हैं वह भी खेती छोड़ रहे हैं क्योंकि ज्यादातर खेती वर्षा पर आधारित है। दूसरे जो है भी तो बन्दरों, जंगली जानवरों और आवारा पशुओं के नुकसान की वजह से कोई खेती नहीं करना चाहता। कर्नल राणा के अनुसार उनके मन में ख्याल आया कि सेना में रहते हुए हर हाल में सभी प्रकार की चुनोतियों का दिलेरी से सामना किया और उन पर विजय पाई। तो अब गांव में भी कुछ ऐसा किया जाए जिससे लोग खेतीबाड़ी से जुड़ें और इलाके व  हिमाचल का नाम पूरे भारतवर्ष में इसके लिए जाना जाए। इसी विचार के साथ उन्होंने इस सोच पर कार्य शुरू किया कि ऐसा क्या किया जाए कि खेती में बंजर जमीन भी इस्तेमाल हो जाए और कम मेहनत व लागत से  बिना किसी उजाड़ से साल भर खेती कर अच्छी आमदन हो सके। काफी सोच विचार के बाद उन्हें लगा कि हल्दी ही एक ऐसी फसल है जो पूरे विश्व में घर-घर में इस्तेमाल होती है। साथ ही इसका सौंदर्य प्रसाधनों व कई दवाइयों में भी प्रयोग किया जाता है। इसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर ही प्रयास शुरू किए और इसके लिए आंध्र प्रदेश के प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर से मिलकर हल्दी की खेती की पूरी जानकारी हासिल की। इन्होंने देखा कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में किसान हल्दी की खेती में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनका इरादा ऑर्गेनिक हल्दी की खेती करने का था। इसलिए इन्होंने आंध्र प्रदेश में ही प्रगतिशील किसान  चंद्रशेखर को ऑर्गेनिक बीज तैयार करने का प्रोजेक्ट दिया। वहां पर शुद्ध आर्गेनिक बीज को तैयार करने में 2 साल का समय लगा जिसका पूरा खर्च इन्होंने अपनी जेब से वहन किया। फिर वहां से 15 क्विंटल ऑर्गेनिक बीज लेकर अपनी जमीन में हल्दी की खेती की शुरुआत की।
उन्होंने बताया कि इस बीज की खासियत यह है कि इसमें कुकुमिन तेल की मात्रा काफी ज्यादा है जो कि लैब परीक्षण में 5.2% आँकी गई है जो कि इसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है। इसके अलावा सामान्य हल्दी की फसल में 2 से 3 वर्ष का समय लगता है वही हल्दी का यह बीज 7 महीने यानी 210 दिन में तैयार हो जाता है। इसके अलावा इस की फसल बढ़ोतरी भी 20 से 30 गुणा है जोकि बाकी हल्दी से कई गुना ज्यादा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर ही प्रयास शुरू किए और पिछले 2 सालों में तकरीबन 300 किसानों को अपने साथ जोड़कर हल्दी की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। इस समय वह खुद तकरीबन सौ कनाल बंजर भूमि पर हल्दी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्ष तकरीबन 1 टन हल्दी के बीज की बिजाई की थी जिससे उन्हें अभी 7 महीने में 24 टन हल्दी की पैदावार हुई है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा तैयार हल्दी पूरी तरह आर्गेनिक है और इस का लैब परीक्षण के बाद ग्लोबल सर्टिफिकेशन सोसाइटी द्वारा आर्गेनिक हल्दी का प्रमाण पत्र भी मिल गया है। उन्होंने बताया कि वह हल्दी की खेती करने वाले किसानों को पहले अपने खेतों में इसकी खेती की पूरी जानकारी देते हैं। उसके बाद ही उन्हें बीज देते हैं। कर्नल राणा के अनुसार यदि 7 महीने में 20 से 30 गुणा फसल बढ़ोतरी का फायदा होता है तो इससे बढ़िया और क्या हो सकता है।
उनका कहना है कि हिमाचल में कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी और ऊना जिलों का इलाका हल्दी की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है और इन सभी जगह से किसान उनके साथ जुड़कर हल्दी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने वाले मिशन को पूरा करने पर काम कर रहे हैं और उनका प्रयास है कि जो नौजवान खेती से मुंह मोड़ कर 5-7 हजार की नौकरी के लिए भटक रहे हैं, उन्हें इस प्रकार की खेती से जोड़ा जाए जिससे कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा कर अपना जीवन स्तर बेहतर कर सकें।
हाल ही में राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड( आयुष मंत्रालय) भारत सरकार के अंतर्गत रिसर्च इस्टीट्यूट इन इंडियन मेडिसन (नार्थ जोन) द्वारा धर्मशाला में 28 फरवरी को आयेजित होने वाली सेमिनार के लिए कर्नल पीसी राणा को उन के द्वारा तैयार उच्च गुणवत्ता वाली कूकुमिन ऑयल से भरपूर हल्दी की पैदावार  पर बयाख़्यान देने के लिये  आमन्त्रित किया  है। जो टर्मरिक मैन  के लिए गर्व की बात है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।