पाक का मनोबल तोडऩा जरूरी था
March 1st, 2019 | Post by :- | 269 Views

लवामा हमले के 12 दिन बाद 26 फरवरी को तड़के भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने देश के विभिन्न् हिस्सों से उड़ान भरी और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित बालाकोट में आतंकी संगठन जैश के ठिकानों पर हमले किए। बालाकोट में भारतीय वायुसेना का सफल हवाई हमला एक शानदार सफलता है। यह हवाई हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। वह हतप्रभ रह गया। भारतीय वायुसेना ने इस साहसिक सैन्य अभियान के लिए जिस तरह लड़ाकू विमानों, शस्त्रों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का चयन किया, वह उसके पेशेवर अंदाज की उत्कृष्ट मिसाल है। हमारी वायुसेना ने एकदम सटीक-संतुलित आकलन किया और नियंत्रित हमले से अपना उद्देश्य पूरा किया।

इस पर हैरानी नहीं कि पाकिस्तान की शुरुआती प्रतिक्रिया मुकरने वाली ही रही। ऐसा ही रवैया उसने सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी अपनाया था। भारत के हवाई हमले ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया है। पुलवामा हमले के बाद से ही भारत पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर अलग-थलग करने, आर्थिक रूप से कमजोर करने में जुटा था। अब उसने उसे सैन्य रूप से भी तगड़ा झटका दिया है। यह उसे झकझोरकर उसका मनोबल तोडऩे वाला साबित होगा। वैश्विक बिरादरी से पाकिस्तान को काटने के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत कूटनीतिक मोर्चे पर बहुत अच्छी स्थिति में है। आतंकी गतिविधियों के लिए अधिकांश देश पहले ही पाकिस्तान की कड़ी भत्र्सना कर चुके हैं। यहां तक कि भारत चीन पर भी दबाव बना रहा है कि वह पाकिस्तान पर अपना नजरिया बदले।

भारत को पाकिस्तान पर सैन्य शिकंजा कसने के लिए ईरान और अफगानिस्तान को साथ लेकर पाकिस्तान से लगी सीमा पर एक मोर्चा बनाना चाहिए। हालांकि सऊदी अरब और अमेरिका के रुख को देखते हुए ऐसे सैन्य समन्वय को लेकर तेहरान जरूर कुछ हिचक दिखा सकता है। नई दिल्ली को तेहरान को आश्वस्त करना होगा कि लड़ाई में उलझने के बजाय मामला केवल सैन्य दबाव बढ़ाने तक सीमित रहेगा। इससे पाकिस्तान को अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर सेना की तैनाती के समीकरणों को नए सिरे से साधना होगा। इससे भारत का काम आसान हो जाएगा और पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की हिमाकत नहीं करेगा।

भारत के पास सैन्य विकल्पों की भी कमी नहीं है। जमीनी हमलों और नियंत्रण रेखा पर अहम चौकियां कब्जाने से लेकर वैसे अचूक हवाई हमले भी किए जा सकते हैं, जैसा गत दिवस किया गया। पीओके में आतंकी ठिकानों को बार-बार निशाना बनाया जाना चाहिए। आतंकी ठिकानों और प्रशिक्षिण शिविरों के लिए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बारे में भी सोचा जा सकता है। इसके अलावा मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकियों को इसराइली शैली वाले खुफिया अभियानों से ठिकाने लगाया जा सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक भी एक विकल्प है, लेकिन कार्रवाई करके निकलने के बजाय सुरक्षा बल उस हिस्से पर काबिज भी हो सकते हैं। बलूची, सिंधी, पश्तूनों, गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके में कश्मीरियों की मदद के लिए भी भारत को खुफिया अभियान चलाने चाहिए। इन अशांत इलाकों में अलगाववाद की आग भड़की हुई है, जिसे भुनाना चाहिए। बलूची स्वतंत्रता सेनानियों की मदद के लिए पाकिस्तान की तकरीबन एक हजार किलोमीटर लंबी सीमा रेखा भी काफी काम आ सकती है।

पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएं। इसी तरह सिंधु जल समझौता भी खत्म करने पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही सरकार को कश्मीर में अलगाववादी नेताओं पर भी शिकंजा कसना होगा। उनकी सुरक्षा हटाने के साथ ही ऐसे उपाय भी किए जाएं, ताकि उन्हें इसका आर्थिक खामियाजा भी भुगतना पड़े। सरकार को जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में धारा 370 की भी समीक्षा करनी चाहिए। अलगाववादियों के साथियों पर भी शिकंजा कसना होगा। सभ्य व्यवहार का जिम्मा केवल सरकार का नहीं है, बल्कि यह परस्पर रूप से होना चाहिए।

पाकिस्तान भारत की राह में एक बड़ा कांटा है और उसका यह चरित्र कभी नहीं बदलने वाला। पाकिस्तान के आतंकी उन्माद से निपटने के लिए दीर्घकालिक नीतियों की दरकार होगी। पाकिस्तान अगर भारत पर कभी बुरी नजर डालें तो उन्हें तत्काल रूप से जवाब देने के लिए भारत को आकस्मिक योजना तैयार करनी चाहिए। सुरक्षा बलों के लिए एक सामान्य संचालन संहिता तैयार की जानी चाहिए कि विशेष हालात में वे स्वत: कोई निर्णय कर सकें। बालाकोट में हुए हवाई हमले के बाद पाकिस्तान के सभी वर्गों में अफरातफरी का माहौल है। यह इस बात का परिचायक है कि उसके विकल्प सीमित हो गए हैं। अपेक्षित परिणामों के लिए भारत को व्यावहारिक नीति बनानी होगी। इस साहसिक फैसले के प्रधानमंत्री मोदी की जितनी तारीफ की जाए, कम है। तारीफ भारतीय वायुसेना की भी करनी होगी, जिसने अपने अद्भूत शौर्य की मिसाल कायम की है।

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