भाखड़ा डैम से पानी छोड़ने के बाद जालंधर के 85 गांव खाली कराए, डीसी ने देखे 63 गांवों के हालात
August 18th, 2019 | Post by :- | 318 Views

भाखड़ा डैम से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने अगले कुछ घंटों में भारी बारिश की चेतावनी के बाद जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। एडवाइजरी के बाद जालंधर जिले के 85 गांवों को खराली करा लिया गया है, वहीं डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने रविवार को 63 गांवों का दौरा किया। उन्होंने शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर के एसडीएम को हाई अलर्ट पर रखा है।

हालांकि शनिवार को भाखड़ा डैम से 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के चलते यहां पानी और अधिक हो गया तो ज्यादा मात्रा में रिलीज किए जाने की जरूरत पड़ी। जानकारी मिली है कि इसी के चलते रविवार सुबह तक 1,89,940 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बाद निचल इलाकों खासकर जालंधर जिले के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर के ग्रामीण इलाकोें में परेशानी खड़ी हो गई है।

यह तीनों इलाके सतलुज दरिया के किनारे आते हैं। ऐसे में डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों को आदेश दिया है कि उन्हें किसी भी वक्त ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है। वह अपना मोबाइल 24 घंटे चालू रखें। साथ ही सरकारी मुलाजिम तैनाती वाले स्टेशनों पर ही रहें। उन्होंने पानी छोड़े जाने व मौसम विभाग के भारी बारिश की चेतावनी के बाद एडवाइजरी जारी करते हुए सतलुज दरिया के नजदीक और निचले इलाकों में रहने वालों को दरिया के नजदीक न जाने की सलाह दी है।

इस बारे में पश्चिमी विक्षोभ के चलते बनी संभावना मौसम विभाग के डायरेक्टर डॉ. सुरिंदर पाल बताते हैं कि मानसून और पश्चिम विक्षोभ के चलते ही नॉर्थ में आने वाले 72 घंटे के दौरान भारी बारिश की संभावना बनी है। विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस अवधि में जिले में 120 एमएम तक बारिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि इससे जालंधर के अलावा पठानकोट, नवांशहर, तरनतारन, लुधियाना, पटियाला, संगरूर, मानसा, बठिंडा, मोगा, बरनाला में भी भारी बारिश की संभावना है।

सेहत विभाग ने रेपिड रिस्पांस टीमों को किया अलर्ट
सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदर कौर चावला ने बाढ़ के हालात से निपटने के लिए सेहत विभाग ने रेपिड रिस्पांस टीमों को अलर्ट कर दिया है। जिला स्तर पर सहायक सिविल सर्जन डॉ. गुरमीत कौर की अगुवाई में जिला एपीडिमोलॉजिस्ट डॉ. सतीश कुमार व डॉ. शोभना बंसल की टीम गठित की गई है। इनकी निगरानी में ब्लाक स्तर पर नौ, 13 सीएचसी, नौ पीएचसी तथा दो सब डिवीजन स्तर पर डॉक्टरों की टीमें गठित की गई है। शहर में 11 टीमें बनाई गई है।

फसलों को होगा भारी नुकसान
कृषि अधिकारी डॉ. नरेश गुलाटी ने बताया कि जिले में 1.70 लाख हेक्टेयर रकबे में धान तथा नौ हजार हेक्टेयर जमीन पर मक्की की फसल लगाई गई है। बारिश या फिर बाढ़ को लेकर किसानों को पानी की निकासी के लिए उच्च प्रबंध करने चाहिए।

निगम के हाथ-पांव फूले, 43 इलाके संवेदनशील
भारी बरसात के अलर्ट के बाद निगम के हाथ-पांव फूल रहे हैं। 70 इलाकों में हल्की बरसात से भी पानी भर जाता है और अगर भारी बरसात हुई तो इन इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। निगम ने 43 इलाकों को तो पहले से ही संवेदनशील घोषित किया हुआ है। इन इलाकों में बस्तियों की 120 फुट रोड, प्रीतनगर-सोढल रोड, किशनपुरा, नीलामहल, बस्ती शेख, चिंतपूर्णी मंदिर रोड, दोमोरिया पुल, इंडस्ट्रीयल एस्टेट प्रमुख हैं।

शहर में बरसाती सीवेरज न होने से ऐसे हालात बनते हैं। बरसाती पानी की निकासी स्लज सीवरेज पर ही है। सूर्या एन्क्लेव की सीवर लाइन टूटने से खतरा बना हुआ है। ऑपरेशन एंड मेंटिनेस डिपार्टमेंट के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सतिंदर कुमार ने कहा कि शहर की रोड गलियों को बार-बार साफ करवाया जा रहा है। सभी जोन दफ्तरों में ट्रैक्टर और पंप सेट उपलब्ध करवाए गए हैं।

सिर्फ 45 किलोमीटर है बरसाती सीवर
शहर में घरों से जुड़ा करीब 1800 किलोमीटर स्लज सीवरेज है। बरसाती सीवर सिर्फ 45 किलोमीटर ही है। इसमें से 25 किलोमीटर मेन और 20 किलोमीटर छोटी लाइन है। शहर में 500 किलोमीटर सीवरेज होना जरुरी है। इस पर करीब 500 करोड़ रुपए खर्च आएगा। स्मार्ट सिटी में कुछ इलाकों में बरसाती सीवर डालने की तैयारी की गई है।

प्रताप बाग दफ्तर में निगम का इमरजेंसी ऑफिस
नगर निगम ने प्रताप बाग में फ्लड कंट्रोल सेंटर बनाया है। जोन दफ्तर में ट्रैक्टर, पंप सेट, जेटिंग मशीन, इलेक्ट्रिशियन, सीवरमैन 24 घंटे मौजूद रहेंगे। एसई सतिंदर कुमार ने कहा कि जो इलाके जलभराव के लिहाज से संवेदनशील हैं उन इलाकों में सीवरमैनों को निर्देश है कि वह रोड गलियों को लगातार साफ करते रहें।

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