शिक्षा बनी मजाक, पूर्व सरकारों ने रेवड़ियों की तरह बांटे विवि: शांता
January 22nd, 2020 | Post by :- | 228 Views

हिमाचल में शिक्षा के लगातार गिरते स्तर पर पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने बिना नाम लिए पूर्व में रही भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों को कटघरे में खड़ा किया है। शांता ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का विस्तार जनसंख्या की दृष्टि से सभी प्रदेशों से अधिक हुआ, लेकिन राज्य में पिछली सरकारों के कारण इसका स्तर बहुत ज्यादा गिर गया है। हालात यह हैं कि हिमाचल जैसे छोटे से प्रदेश में 21 विश्वविद्यालय हैं। सोलन में सात विवि हैं। इसी जिले की एक पंचायत में तीन विवि हैं। प्रदेश में शिक्षा के नाम पर मजाक हुआ। पिछली सरकारों ने आखिर किस उद्देश्य से रेवड़ियों की तरह विश्वविद्यालय बांट दिए। इस कुव्यवस्था से लाखों युवा बेरोजगार हो रहे हैं। पटवारियों के 1194 पदों के लिए 3 लाख उम्मीदवारों में से केवल 1185 पास हुए।

टीजीटी मेडिकल परीक्षा में केवल 5.13 प्रतिशत छात्र पास हुए। विभिन्न नौकरियों के लिए भर्तियों में भी इसकी झलक दिख रही है। एक कमरे में चल रहे विश्वविद्यालयों में युवाओं को डिग्रियां तो मिल रही हैं, लेकिन योग्यता नहीं। कुछ पूंजीपतियों और नेताओं ने हिमाचल में विवि खोलने को कमाई का धंधा बनाया था। सीबीआई प्रदेश में फर्जी शिक्षा संस्थाओं का पता लगा रही है।

कई विवि और शिक्षण संस्थानों में न स्टाफ पूरा है न बैठने के लिए भवन हैं। कुछ शिक्षण संस्थाएं केवल डिग्री देने वाली दुकानें बन गई हैं। प्रदेश में फर्जी विश्वविद्यालयों और उनमें गुणवत्ता जांचने को हिमाचल प्रदेश निजी शैक्षणिक संस्थान (रेगुलेटरी कमीशन) की स्थापना की गई है, लेकिन यह रेगुलेटरी कमीशन कुर्सी पर बैठकर मौज कर रहा है। कमीशन के अध्यक्ष खुद कई विवादों में घिरे हैं। इसे ही रेगुलेट करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री जयराम शिक्षा के गिरते स्तर पर तुरंत जरूरी कदम उठाएं।

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