शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स को बिना स्ट्रेस पढ़ाने के दिए आदेश
February 26th, 2020 | Post by :- | 174 Views

शिमला – सरकारी स्कूलों में अब प्री-प्राइमरी से लेकर अन्य प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों को बिना स्ट्रेस से पढ़ाने के आदेश हो गए हैं। विंटर स्कूलों मे चार फरवरी से स्कूल खुल गए हैं, वहीं इन स्कूलों में केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के तहत पढ़ाना शुरू हो गया है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग ने अब समर सरकारी स्कूलों को भी इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पढ़ाई की वजह से अब छात्रों को अगर स्ट्रेस हुआ, तो ऐसी स्थिति में शिक्षकों की जवाबदेही होगी। साथ ही यह भी आदेश हुए हैं कि अंग्रेजी से लेकर शब्दों का ज्ञान खेल-खेल तरीके से होना चाहिए। अहम यह है कि इस बार प्राथमिक स्कूलों में स्टडी का प्रारूप बदलने के साथ ही अब हर साल रिजल्ट का आकलन किया जाएगा। बिना तनाव लिए छात्रों का पढ़ाई पर कितना फोकस हुआ और कैसा रिजल्ट रहा, यह सब आंका जाएगा। फिलहाल पढ़ाई करते-करते अब सरकारी स्कूल के छात्रों को मानसिक तनाव से नहीं जूझना पड़ेगा। नए सत्र से छोटे बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों में बदलाव प्रदेश सरकार करेगी। इसमें सबसे पहले ध्यान रखा जाएगा कि तीन से पांच साल तक के छात्रों को पढ़ाई बोझ न लगे, इसके लिए शिक्षा प्रणाली उनके सामने खेल के रूप में दर्शाई जाएगी। बताया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन को इस सत्र से बदला जा रहा है। यानी कि तीन से पांच साल तक के छोटे बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास कैसे करना होगा, इस पर अब शिक्षा विभाग फोकस करेगी। बताया जा रहा है कि स्टार प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों में नर्सरी केजी, एलकेजी के छात्रों को कक्षाओं में पाठ, पहाड़े, गिनती, एबीसी पढ़ाने के बजाय खेलकूद पर ज्यादा फोकस किया जाएगा। यानी कि कक्षाओं में लेक्चर सुनने से छोटे बच्चों के दिमाग पर ज्यादा प्रभाव न पड़े, तो उन्हें खेल गतिविधियों के माध्यम से इस तरह पढ़ाया जाएगा, मानों वे स्कूल में पढ़ाई को बोझ की तरह न ले। दरअसल केंद्र सरकार ने स्टार प्रोजेक्ट के तहत सभी राज्यों को 500 करोड़ तक के बजट की ग्रांट जारी करने का फैसला लिया है। हर राज्य को स्टार के तहत मिलने वाले बजट के तहत लर्निंग आउटकम्स सुधारना है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।