स्कूल बस हादसों पर भाजपा विधायक ने अपने ही मंत्री को घेरा, पूछा- और कितनी लाशें देखेंगे
February 6th, 2019 | Post by :- | 334 Views
हिमाचल विधानसभा में नूरपुर से भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने अपनी ही पार्टी के मंत्री को घेर लिया। प्रदेश में स्कूल बस हादसों पर उन्होंने कहा – मंत्री जी सीरियस होने की जरूरत है, आप और कितनी लाशें देखना चाहेंगे। कांग्रेस के विधायक विनय कुमार ने प्रश्नकाल में सिरमौर के ददाहू स्कूल बस हादसे का मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि बीते दिनों हुए इस स्कूल बस हादसे की सरकार फिर से जांच कराएगी।

यह जांच इस बिंदु पर होगी कि जब आरटीओ ने बच्चों को लेकर जाने वाली पुरानी बस की पासिंग से इंकार कर दिया था तो उच्च अधिकारी ने इसे कैसे पास कर दिया। सीएम ने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी इसे सरकारी तंत्र की चूक करार देते हुए कहा कि क्या दफ्तर में बैठे-बैठे ही गाड़ी को चेक किया गया।

विधायक विनय के सवाल पर परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि स्कूल की संबद्धता निरस्त कर बस मालिकों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार को निष्क्रिय बताते हुए इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही बताया।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों के हमलों के बीच परिवहन मंत्री की मदद करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार हादसों को लेकर सख्त है और हर हाल में पूरी जांच होगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

उधर नूरपुर के भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने सदन में अपने ही मंत्री को घेरते हुए यहां तक कह दिया- मंत्री जी! सीरियस होने की जरूरत है। अब आप और कितनी लाशें चाहेंगे। नूरपुर हादसे में उन्होंने बच्चों की लाशें उठाई हैं। रात को नींद नहीं आती है।

विनय कुमार ने जब चालक के लाइसेंस और स्कूल की संबद्धता निरस्त करने पर सवाल किया तो परिवहन मंत्री मुश्किल में पड़ गए। इसी बीच, भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने नूरपुर बस हादसे का उदाहरण देते हुए सरकार पर हो रही मौतों को लेकर मौन होने पर रोष जताया।

पठानिया ने अपनी ही सरकार को हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठने देने की सलाह दे डाली। पठानिया ने कहा कि उन्होंने नूरपुर हादसे के बीत जाने के इतने दिनों के बाद एक सूमो को रोका। इसमें 31 बच्चे ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे। छह किलोमीटर की एवरेज निकालने के चक्कर में बसों को न्यूट्रल किया जा रहा है। बच्चों की जिंदगियां जोखिम में डाली जा रही हैं।

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