100 हेल्पलाइन बनी सिर्फ मन की तसल्ली
December 7th, 2019 | Post by :- | 109 Views

प्रदेश सरकार ने 1100 शिकायत सेवा चलाई है, मगर लोगों के लिए यह सिर्फ मन की तसल्ली है कि हमने शिकायत की हुई है।
इस हेल्पलाइन में कस्टमर केयर तो बेहतरीन है, मगर कार्यवाही के नाम पर बस तसल्ली ही है। कार्रवाई किसी पर नहीं होनी होती, बस शिकायत कर्ता को यह लगता है कि उसने शिकायत कर दी है।
1- हेल्पलाइन में यह सुनिश्चित नहीं है कि शिकायत पर जांच कौन करेगा। जैसे मान, लीजिए आप किसी एक्सईएन की शिकायत कर रहे हैं, तो मामला सब डिवीजन में आएगा.. यानी जांच या तो एसडीओ करेगा, या वहां का क्लैरिकल स्टाफ. अब ये लोग अपने से बड़े, और अपने ही ऑफिसर के खिलाफ तो शब्द भी संजोकर ही लिखेंगे..
2-शिकायत कर्ता का स्थाई पता लिया जाता है, जो शिकायत के पते में घुलकर शिकायत का पता ही बदल देता है। जैसे कि मान, लीजिए, शिकायत कर्ता शिमला की रामपुर बुशहर की किसी पंचायत का है, मगर वह कांगड़ा के पालमपुर में प्रताड़ित हुआ और बह पालमपुर की शिकायत कर रहा है। तो दोनो जगह के पते एक साथ लिख दिए जाएंगे। कभी यह शिकायत रामपुर जाएगी, कभी पालमपुर
3- कोई समय सीमा नहीं है कि शिकायत का निपटारा कब होगा.. यानी यह शिकायत दफतरों के, मेजों पर पड़ी रहेगी
4- शिकायत को हिंदी में नहीं लिखा जाता, देबनागरी में लिखा जा रहा है, जैसे( शिकायत थी-हमें पीने के पानी की तकलीफ़ है.. इसे लिखा जाएगा- HAME PINE KE PANI KI TAKLEEF HAI)

जिससे समझ ही नहीं आता, कि शिकायत है क्या

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