गिरिपार क्षेत्र की 154 पंचायतों में 7 साल में हुए 106 एट्रोसिटी के मामले: आशीष कुमार #news4
July 11th, 2022 | Post by :- | 91 Views

नाहन : सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन में सोमवार को गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार सरंक्षण समिति के साथ कई एससी संगठनों ने रोष रैली निकालकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इस रैली में गिरीपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति के साथ, दलित शोषण मुक्ति मंच, भीम आर्मी, अखिल भारतीय कोली समाज, वाल्मीकि सभा, विश्वकर्मा सभा, युवा कोली समाज के सदस्य भी शामिल रहे। गिरीपार अनुसूचित जाति अधिकार सरंक्षण समिति के अध्यक्ष अनिल मंगेट, दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार, भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष विपिन कुमार, महासचिव सुंदर सिंह की अध्यक्षता में नाहन बाज़ार से होते हुए सैकड़ों की संख्या में जिलाधीश कार्यालय पहुंचे।

प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश सिरमौर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में “हाटी” व गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र घोषित होने से इस क्षेत्र मे रहने वाले 40 प्रतिशत अजा. वर्ग के उपर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि गिरीपार क्षेत्र की अनुसूचित जातियां सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप पिछड़ी है, क्योंकि परंपरागत रूप से इन्ही निचली जातियों (कोली, ढाकी, डूम, चनाल, बाढी, लोहार आदि ) के साथ छुआछूत किया जाता रहा है। अनिल व आशीष ने अपने संबोधन में “हाटी” जनजाति घोषित करने से गिरीपार क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम ,1989 के निष्क्रिय होने के खतरे के बारे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र मे उत्पीडन की घटनाएं और अधिक बढ़ जाने की संभावना है। उन्होने बताया कि गिरीपार की 154 पंचायतों में वर्ष 2015 से 2022 तक एट्रोसिटी एक्ट में हत्या के जघन्य मामलों सहित 106 मामले इसी गिरीपार क्षेत्र के हैं।

सभी संगठनों ने शंका जाहिर करते हुए खतरा जताया कि यदि गिरीपार की तमाम जातियों को “हाटी” जनजाति घोषित करके एक ही छतरी के नीचे लाया गया। तो अनुसूचित जाति एवं ओबीसी वर्ग को पंचायती राज‌ संस्थाओं में प्राप्त संवैधानिक आरक्षण समाप्त हो जाएगा। जिसका उदाहरण उन्होने किन्नौर जिला मे 2020 के पंचायती राज चुनावों मे उपायुक्त किन्नौर द्वारा जारी पंचायत रोस्टर को पेश कर दिया। जिसमे जिला किन्नौर की समस्त 73 पंचायतों मे प्रधान पद केवल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।‌ दलित शोषण मुक्ति मंच ने केंद्र सरकार से मांग रखी की गिरीपार की 40 प्रतिशत अजा. के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की जाए व जल्दबाजी मे जनजातीय क्षेत्र घोषित कर अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों का हनन ना किया जाए। सभी संगठनो ने आरजीआई की सर्वे रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए, सभी संगठनों ने एक सुर में कहा कि 40 प्रतिशत आबादी को इस सर्वे में शामिल नहीं किया गया।

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