हिमाचल के वन क्षेत्र में पेड़ कटान पर पूरी तरह प्रतिबंध
March 14th, 2019 | Post by :- | 52 Views

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में विकास कार्य के लिए वन क्षेत्रों में पेड़ काटने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। शीर्ष अदालत में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को राज्य सरकार को वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए तब्दील करने पर भी रोक लगा दी।

मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।  पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन परियोजनाओं को अनुमति दे दी गई है, लेकिन अब तक वहां पेड़ों को नहीं काटा गया है, वहां भी अगले आदेश तक यह रोक जारी रहेगी।

गौरतलब है कि वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राधिकरणों को सड़क, अस्पताल, स्कूल व अन्य विकास कार्यों के लिए प्रति हेक्टेयर जमीन से 75 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संबंधी रिपोर्ट देखने पर यह निर्णय लिया। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

पीठ ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वनों को और किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट शब्दों मेें कहा है कि हिमाचल प्रदेश के अनमोल और बेशकीमती वनों को किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।

हिमाचल में प्रोजेक्टों का काम अटकेगा 

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद राज्य में निर्माणाधीन कई परियोजनाओं का काम अटक गया है। बड़ी संख्या में ऐसी सड़कें हैं जो इस रोक के दायरे में आ गई हैं, जिन्हें हाल ही में फोरेस्ट क्लीयरेंस मिली है।

इनमें पीएमजीएसवाई और नाबार्ड से वित्त पोषित ग्रामीण सड़कें भी शुमार हैं। कई परियोजनाओं को फोरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बावजूद उनमें अभी तक पेड़ नहीं कटे हैं। इनका काम रुक जाएगा।

प्रदेश में लगभग 70 नए नेशनल हाईवे बनाए जाने हैं। इनके लिए भी वन कटान की मंजूरी अटक सकती है। फोरलेन बनाने का काम भी फंस सकता है। अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों आदि के लिए भी भवन निर्माण का काम इसी तरह से अटक जाएगा।

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