60 साल से चुनावी मुद्दा बनकर रह गई पावंटा साहिब को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग
March 27th, 2019 | Post by :- | 87 Views

पांवटावासियों को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग का मुद्दा पिछले 60 साल से लंबित पड़ा है। चुनाव जीतने के बाद केंद्र सरकार के रेलवे मंत्रालय में गुम हो जाता है। पांच साल बाद फिर चुनाव आते हैं और फिर नेता रेलवे की मांग पूरी करने और पावंटा को रेलवे से जोड़ने की घोषणाएं करके जनता को गुमराह करते हैं।

कांग्रेस के नेता कहते हैं कि हमने सर्वे के लिए बजट मंजूर करवाया। भाजपा ने इसको ठंडे बस्ते डाल दिया, जबकि हकीकत यह है कि पांवटा को रेलवे लाइन मांग के लिए किसी ने दमदार तरीके से अपनी मांग रेलवे मंत्री के सामने रखी ही नहीं।

पांवटा साहिब की जनता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई बार पत्राचार किया। सिरमौर की नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र मोहन रमौल, हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. मदन लाल खुराना, चैंबर ऑॅफ काॅर्मस पांवटा साहिब के अध्यक्ष सतीश गोयल, गुरुद्वारा प्रंबधक कमेटी मैनेजर सरदार कुलवंत सिंह ने पत्र लिखे। इस पत्र में मांग की गई है कि सिरमौर जिला के पांवटा क्षेत्र को रेल लाइन से जोड़ने के लिए 60 के दशक में सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया गया था।

इसमें पांवटा को यमुनानगर (जगाधरी,) सहारनपुर अथवा चंडीगढ़ से जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जानी थी। इसके लिए वर्ष 1962 मे सर्वेक्षण का कार्य किया गया, लेकिन यह भी सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद चंडीगढ़ से देहरादून वाया बद्दी औद्यौगिक क्षेत्र, कालाअंब, पांवटा साहिब व सेलाकुई रेल लाइन बिछाने के लिए ममता बेनर्जी के मंत्रीत्वकाल में 2 करोड़ की धनराशि आबंटित की गई थी, लेकिन यह मामला भी फाइलों में ही दब कर रह गया। इसके बाद जगाधरी-पांवटा-राजबन रेल मार्ग बनाने के लिए सर्वेक्षण का कार्य वर्ष 1972 में भी किया गया। तब भी सर्वे नहीं हुआ।

फिर रेल मंत्रालय ने पांवटा को धार्मिक स्थल पेवाह जगाधरी हरियाणा होते हुए रेल मार्ग से जोड़ने का एक प्रस्ताव योजना आयोग को भेजा। यह भी ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2016 में पांवटा को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग के लिए संसद में मामला उठा। उस वक्त रेल राज्य मंत्री ने घनौली-बद्‌दी-नालागढ़-कालाअंब-पांवटा-देहरादून के बीच नई रेलवे लाइन का सर्वेक्षण कार्य जल्द पूरा करने की बात कही और कहा कि अनुमानित राशि के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव योजना आयोग को भेजा है। इसके बाद भी रेलवे लाइन की मांग को पूरा नहीं किया । इसके अलावा यहां पर रेलवे संघर्ष समिति भी बनी। इस समिति ने भी बार-बार मांग उठाई।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।