1700 एन.एच.एम. कर्मचारी रहेंगे हड़ताल पर, सरकार पर फूटा गुस्सा #news4
January 31st, 2022 | Post by :- | 117 Views

शिमला : हिमाचल प्रदेश राज्य समिति (एन.एच.एम.) अनुबंध कर्मचारी संघ ने मांगें पूरी न होने पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जहां इन दिनों एन.एच.एम. कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर काले बिल्ले लगाकर काम कर रहे थे, वहीं अब उनका गुस्सा सरकार पर उतर आया है और कल यानी 2 फरवरी को पूरा दिन प्रदेश भर में 1,700 कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान कर्मचारी बिल्कुल भी काम नहीं करेंगे। कर्मचारियों द्वारा फिलहाल एक दिन की हड़ताल की जाएगी। इस दिन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से कोरोना की टैस्टिंग व वैक्सीनेशन करने में दिक्क तें आ सकती हैं, क्योंकि यह सारा जिम्मा इन्हीं कर्मचारियों पर है। इसके अलावा अस्पतालों में भी दिक्क तें आएंगी। हिमाचल एन.एच.एम. अनुबंध कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अमीं चंद ने कहा कि अगर सरकार उन्हें इस बीच वार्तालाप के लिए बुलाती है तो हड़ताल वापस भी ली जा सकती है लेकिन सरकार अगर उन्हें वार्तालाप के लिए भी नहीं बुलाती है तो आंदोलन तेज होगा और कर्मचारी उसी दिन आगामी रणनीति तैयार करेंगे।

यह आंदोलन अब तेज होगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संघ ने 5 जनवरी को सरकार को अल्टीमेटम दे दिया था। उन्होंने सरकार को 25 जनवरी तक का समय पॉलिसी बनाने का दिया था। मगर सरकार ने कर्मचारियों के लिए कोई पॉलिसी नहीं बनाई। ऐसे में मजबूरन कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सभी जिलों के एन.एच.एम. कर्मचारियों ने सी.एम.ओ. के माध्यम से भी सचिव स्वास्थ्य मिशन निदेशक व निदेशक स्वास्थ्य सहित सभी अधिकारियों को ज्ञापन भेज दिया है। फिर भी अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। एक फरवरी तक सभी कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर काम कर रहे थे और अब 2 फरवरी को सभी कर्मचारी हड़ताल करेंगे और 3 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल भी हो सकती है।

ऐसे हुई थी एन.एच.एम. कर्मचारियों की भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में राज्य स्वास्थ्य समिति (एन.एच.एम.) के तहत 1996 से कुष्ठ रोग कार्यक्रम से शुरूआत हुई और सन् 1998 से क्षयरोग कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों की नियुक्तियां हुईं और अब तक प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों के तहत विभिन्न पदों पर कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनको अपनी सेवाएं देते हुए लगभग 23 वर्ष हो गए हैं। इनमें से कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं व सेवाकाल के दौरान 4 कर्मचारियों की मृत्यु भी हो चुकी है। जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए, उनको कोई ग्रैच्युटी का लाभ भी नहीं दिया गया। सरकार 23 वर्षों से कोई भी स्थायी नीति नहीं बना पाई है।

3 दिन से एम्बुलैंस कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी  
दूसरी ओर प्रदेश में चलाई जा रही 108 व 102 एम्बुलैंस सेवा में कार्यरत कर्मचारियों ने भी सरकार के खिलाफ विरोध जताया है। इन कर्मचारियों को एन.एच.एम. ऑफिस कसुम्पटी के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल के 3 दिन पूरे हो गए हैं लेकिन सरकार ने इनके हित में कोई निर्णय नहीं लिया है। एम्बुलैंस कर्मचारियों ने नौकरी से निकाले जाने को लेकर हड़ताल की है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार से हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। ऐेसे में कर्मचारियों के साथ हो रहा खिलवाड़ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। अभी तक कम से कम 250 के करीब कर्मचारियों को ज्वाइनिंग पत्र नहीं मिले हैं और सरकार ने जिस कंपनी को टैंडर दिया है, उस कंपनी ने पुराने कर्मचारियों की जगह पर नए कर्मचारी भर्ती करना शुरू कर दिए हैं। पुराने कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला जा रहा है। सरकार ने मेडसवान फाऊंडेशन कंपनी को टैंडर दिया है। इनमें 250 के करीब कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला जा रहा है।

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