नूरपुर बस हादसे की पहली बरसी पर बच्चों को याद कर दी श्रद्धांजलि
April 9th, 2019 | Post by :- | 101 Views

नूरपुर बस हादसे को भले ही एक साल बीत गया हो, लेकिन खुवाड़ा गांव के पीड़ित परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। अपने बच्चों को खोने का सदमा अब इन लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। बच्चों के माता-पिता आज भी उस जख्म को नहीं भूल पाए हैं। उनको याद कर आज भी उनकी आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे हैं। गांव वालों को मालूम नहीं कब न्याय मिलेगा। बस हादसे की पहली बरसी पर बच्चों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

खुवाड़ा गांव के विक्रम सिंह, कर्ण सिंह, हंस राज, सीमा देवी व सिमरन ने बताया कि आज ही के दिन गांव के 24 बच्चे, एक ड्राइवर, दो अध्यापक और एक अन्य दर्दनाक हादसे का शिकार हुए थे। बड़े ही अफसोस कि बात है कि शासन हो या प्रशासन या फिर पक्ष हो या विपक्ष किसी ने भी खुलकर साथ नहीं दिया, जिससे हमारे बच्चों को न्याय मिल सके। गांव के लोग मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों व डीसी कांगड़ा से मिलकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं। उनकी मांग है कि सीबीआई जांच करवाई जाए, जिससे हमें न्याय मिल सके।

साथ ही मृतक बच्चों की आत्मा को शांति मिल सके। बोले कि आज तक कोई भी ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया गया जिससे हमें लगे कि हमारे बच्चों को न्याय मिल रहा है। ग्रामीणों ने जनता से आग्रह किया कि आप एक रैली हमारे बच्चों के नाम से भी निकालें जिससे हमारे बच्चों को इंसाफ मिल सके। जनता से गांववालों ने अपील करते हुए कहा कि हमारे बच्चे आपके भी बच्चे थे इनका साथ दें। हमारे बच्चे वापिस तो नहीं आ सकते पर कोई ठोस कदम हमें न्याय दिला सकता है।

सरकार ने क्यों नहीं मांगी लोक निर्माण विभाग से डैमेज रिपोर्ट
इस बस हादसे में लोक निर्माण विभाग को क्यों बचाया जा रहा है। एक वर्ष हो गया इस हादसे को सरकार इनसे डैमेज रिपोर्ट नहीं मांग पाई है, क्योंकि इसमें बड़े-बड़े अधिकारी फंस रहे हैं। क्या ऐसे और दर्दनाक हादसों का इंतजार कर रही है सरकार। ये पूरा गांव इस बार लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करेगा। किसी भी राजनीतिक दल को वोट नहीं डालेगा। अगर राजनीतिक दल इन बच्चों को न्याय नहीं दिला सकते तो कोई भी राजनीतिक दल इस गांव में वोट मांगने न आए। आप इन बच्चो को इंसाफ नहीं दिलवा सकते तो आपको वोट मांगने का भी हक नहीं।

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