200 सरकारी स्कूल बंद .. एनरोलमंट कम होने की वजह से सरकारी विभागों को दिए जाएंगे भवन
June 7th, 2019 | Post by :- | 357 Views

हिमाचल प्रदेश में लगभग 200 सरकारी स्कूलों के आंगन में छात्र-छात्राओं की चहलकदमी अब नहीं गूंजेगी। इन स्कूलों के दरवाजे छात्रों को शिक्षा का ज्ञान देने के लिए अब कभी नहीं खोले जाएंगे। इन सैंकड़ो स्कूलों में अब केवल सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी बैठकर कार्य करेंगे। शिक्षा विभाग छात्र न होने की वजह से इन स्कूलों को अन्य सरकारी कामों में दे चुका है। ऐसे में शिक्षा की लौ जलाने के लिए खोले गए शिक्षा के मंदिर में कुछ और कार्य शुरू करने से कई सवाल सरकार व विभाग पर उठते हैं। हैरानी की बात है कि बेहतर शिक्षा के दावे करने वाले शिक्षा विभाग की शिक्षा व्यवस्था अभी भी नहीं सुधर पा रही है। छात्रों की एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए गए, वे भी अभी तक सफल नहीं हो पा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हर जिले से शिक्षा विभाग ने छात्रों की संख्या न होने की वजह से कई स्कूलों में ताला लगाकर वहां पंचायत, आंगनबाड़ी या दूसरे सरकारी कामगाजों के लिए किराए पर दिए हैं। शिक्षा विभाग ने यह भी फैसला लिया है कि बंद हुए 200 सरकारी स्कूल अब दूसरी बार नहीं खोले जाएंगे। राज्य में बंद हुए इन स्कूलों के भवनों में अब सामाजिक कार्य किए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने इस बारे में फैसला ले लिया है, वहीं यह भी साफ कह दिया है कि इन बंद हुए स्कूलों के भवनों का किसी न किसी तरह से इस्तेमाल हो सके, इस मकसद से यहां जिला पंचायत स्तर के कार्य करवाने का निर्णय लिया गया है। अहम यह है कि जिन क्षेत्रों में सालों से बंद हुए स्कूल खुलने की जो उम्मीद थी, वह भी अब टूट चुकी है। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि राज्य में जो अन्य सरकारी स्कूल हैं, उन स्कूलों की एनरोलमेंट भी बहुत कम होती जा रही है, ऐसे में बंद स्कूलों में एक बार फिर छात्र होंगे, इसके बारे में कहा नहीं जा सकता। एक ओर जहां प्रदेश के कई जगह स्कूल न होने की वजह से छात्रों को कई मीलों दूर पैदल चलकर शिक्षा ग्रहण करने जाना पड़ता है, तो वहीं दूसरी तरफ एक साथ इतने स्कूलों से शिक्षा को टाटा बाय करना कहीं न कहीं शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल भी उठाता है। स्कूल बनाने से पहले क्या शिक्षा विभाग और सरकार ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि यहां पर छात्रों की एनरोलमेंट न होने की वजह से भवन का निर्माण करना केवल विभाग के बजट की एक तरफ से बेवजह बर्बादी हुई है। बता दें कि प्रारंभिक शिक्षा विभाग के 64 बंद स्कूलों के भवनों को दूसरे विभागों को इस्तेमाल के लिए दिया जाएगा। इसके लिए विभाग ने संबंधित जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर उनसे इस संबंध में प्रोपोजल मांगी है। जिलों व ब्लॉक में जिन विभागों के पास अपने भवन नहीं हैं, वे इन खाली भवनों के इस्तेमाल के लिए जिला उपायुक्तों को आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद जिला उपायुक्त इन आवेदनों को प्रारंभिक शिक्षा विभाग को देगा।

मिल गई, तो विभाग वापस नहीं देंगे बिल्डिंग

विभाग के अधिकारियों ने दोटूक कहा है कि एक बार विभागों को स्कूल का भवन सौंपने के बाद वापस नहीं दिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छात्रों की शिक्षा के मंदिर को आखिर एक साथ क्यों दूसरे विभागों को देने का फैसला सरकार ने लिय। ऐसा प्रोपोजल तैयार किया जाना चाहिए था के जरूरत पड़ने पर भवन वापस लिए जा सकते।

इस साल भी बंद होने हैं प्रदेश के सरकारी स्कूल

हिमाचल में इस साल भी कई सरकारी स्कूलों में छात्रों की एनरोलमेंट घटी है। ऐसे में शिक्षा अधिकारियों के अनुसार अगर किसी स्कूल में दस से कम छात्र होंगे, तो उन स्कूलों को मर्ज किया जा सकता है। विभाग ने जिलों से छात्रों की कम संख्या वाले स्कूलों की रिपोर्ट उपनिदेशकों से तलब की है।

94 भवन विभागों को दिए, 64 और देने की तैयारी

स्कूल की यह प्रॉपर्टी अधिकतर जिला, ब्लॉकों व ग्रामीण क्षेत्रों में है, जो खाली पड़ी है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस प्रॉपर्टी को दूसरे विभाग, जिनके पास अपने भवन नहीं हैं, उन्हें देने जा रहा है। हालांकि इससे पूर्व विभाग 94 स्कूलों के भवनों को दूसरे विभागों को दे चुका है। जानकारी के मुताबिक पिदले वर्षों में शिक्षा विभाग के पास बंद पड़े 200 स्कूलों के भवन खाली पडे़ थे, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा था। ऐसे में सरकार ने इन खाली भवनों को भी दूसरे जरूरतमंद विभागों को देने के आदेश शिक्षा विभाग को दिए थे। इस दौरान विभाग ने 94 स्कूलों के भवनों को पंचायती राज विभाग, कृषि, बागबानी, स्वास्थ्य विभाग को दिए हैं और अब विभाग 64 भवनों को दूसरे विभागों को देने जा रहा है।

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