सेक्स एजुकेशन के 5 पाठ, जिन्हें वयस्कों को भी पढ़ाना चाहिए
July 4th, 2023 | Post by :- | 47 Views
हम सभी ने अपने स्कूली दिनों में सेक्स एजुकेशन के नाम पर विज्ञान की किताब के रीप्रोडक्शन यानी प्रजनन वाले चैप्टर को पढ़ा है. हालांकि बाद में स्कूलों में प्रॉपर सेक्स एजुकेशन देने की मांग बीच-बीच में चलती रहती है और सामाजिक-धार्मिक कारणों और संस्कारों का हवाला देते हुए उनपर लगाम लगा दी जाती है. हम स्कूलों में सेक्स एजुकेशन की बात नहीं कर रहे हैं, हम बड़े लोगों में सेक्स की कमी का ज़िक्र करने जा रहे हैं. क्योंकि ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो शरीर से बड़े हो गए हैं, पर सेक्स के बारे में उनकी सोच बचकानी ही है. हम ऐसे लोगों को सेक्स के पांच चुनिंदा पाठ पढ़ने की सलाह देते हैं.

पहला पाठ: हाइमन वर्जिनिटी की गैरेंटर नहीं है 

सॉरी यह सिर्फ़ अशिक्षित लोगों में ही नहीं, कई अच्छे-ख़ासे पढ़े-लिखे लोग भी हाइमन को वर्जिनिटी की निशानी समझते हैं. कई देशों और समाजों में यह पुख़्ता धारणा है कि महिला ने सेक्स किया है या नहीं, इसकी पुष्टि हाइमन से ही होती है. हालांकि विज्ञान ने काफ़ी पहले ही वर्जिनिटी और हाइमन के रिश्ते को नकार दिया है, पर लोगों की अज्ञानता अभी भी कायम है. हाइमन वेजाइना की ओपनिंग को बंद करनेवाली एक पतली झिल्ली भर है. उसके फटने के सेक्स के अलावा कई और कारण हो सकते हैं. फ़िज़िकल ऐक्टिविटीज़, टैम्पून्स का इस्तेमाल, घुड़सवारी और यहां तक कि जिमनैस्टिक्स के चलते भी हाइमन को नुक़सान पहुंच सकता है.

दूसरा पाठ: सेक्स आपके संस्कारों का प्रतीक नहीं है 

हमारे समाज में सेक्स की बातें करने को बुरी बात कहा जाता है, ऐसे में सेक्स करना तो संस्कारों के ख़िलाफ़ मान लिया जाता है. जो लोग सेक्स को लेकर ओपन होते हैं, उन्हें अक्सर बुरा व्यक्ति समझ लिया जाता है. देखिए सेक्स प्रेम की अभिव्यक्ति का एक माध्यम है. जब दो लोग गहन प्रेम में होते हैं तो शारीरिक भी हो जाते हैं, इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है, यदि यह उनकी समझ और सहमति के अनुरूप हुआ हो तो. सेक्स करने से अगर सब लोग बुरे ही होते तो वे सभी लोग सदचरित्र और अच्छे ही होते, जिन्होंने कभी सेक्स नहीं किया है. पर ऐसा है नहीं.
तीसरा पाठ: होमोसेक्शुऐलिटी विकृति है 

हमें शुरू से यही बताया जाता है कि सेक्स केवल विपरीत लिंगी व्यक्तियों यानी हेट्रोसेक्शुअल्स के बीच के आकर्षण के चलते होता है. पर आज के बदले समय में जब मेडिकल साइंस और क़ानून ने भी माना है कि होमोसेक्शुऐलिटी नैचुरल है तो हमें होमोसेक्शुअल लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए. हमें अपने विचारों को खुला रखना चाहिए और यह मान लेना चाहिए कि शारीरिक आकर्षण समलैंगी लोगों में भी हो सकता है. सेक्स के लिए जेंडर नहीं, इमोशन की ज़्यादा अहमियत होती है.

चौथा पाठ: सेक्स केवल रीप्रोडक्शन के लिए ही ज़रूरी नहीं है

आम धारणा यह है कि सेक्स संतानोत्पत्ति यानी प्रजनन के लिए किया जानेवाला एक काम है. यह सच है कि प्रजनन के लिए सेक्स करना ज़रूरी है, पर यह सच नहीं है कि केवल प्रजनन के लिए ही सेक्स करना चाहिए. सेक्स प्रजनन के अलावा प्यार और स्नेह जताने का भी ज़रिया है. यह शरीर और दिमाग़ की ज़रूरत भी है.

पांचवां पाठ: सेक्स के लिए तैयार होने की एक तय उम्र नहीं है 

अक्सर सेक्स के लिए शरीर के तैयार होने की उम्र पर डिबेट होता है. देखा जाए तो यह डिबेट पूरी तरह से बेमतलब का है. सेक्स के लिए शरीर के साथ-साथ दिमाग़ का मैच्योर होना भी बहुत ज़रूरी है, ऐसे में यह संभव नहीं है कि कोई एक उम्र तय हो सके, क्योंकि भले ही हम सभी के शारीरिक रूप से मैच्योर होने की उम्र लगभग एक हो, पर मानसिक रूप से परिपक्व होने की कोई तय उम्र नहीं होती. जब आपको लगे कि आप तैयार हैं, तभी सेक्स करें, किसी के कहने या दबाव में आकर बिल्कुल नहीं.

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