महाशिवरात्रि पर बैजनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं ने किए महादेव के दर्शन
March 4th, 2019 | Post by :- | 535 Views

शिवरात्रि पर सोमवार को शिव मंदिर भोले बाबा के जयकारों से गूंज उठे हैं. इंदौरा स्थित शिव मंदिर काठगढ़, बैजनाथ, कोटला के त्रिलोकपुर और धर्मशाला के अघंजर महादेव के दर को सजाया गया है. यहां मेले भी होंगे और सुरक्षा की दृष्टि से मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया है. काठगढ़ मंदिर में पुलिस जवानों के साथ-साथ सेना के जवान भी तैनात किए हैं.

  • मंदिर में द्वितीय बटालियन सकोह और इंदौरा थाना के स्टाफ समेत 125 जवानों को मंदिर के भीतर और बाहरी परिसर में तैनात किया गया है
  • मंदिर में 50 से 60 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं.

बैजनाथ मंदिर की मान्यता

  • ऐतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ त्रेता युग में लंका के राजा रावण ने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की तपस्या की
  • कोई फल नहीं मिलने पर दशानन ने घोर तपस्या शुरू की और अपना एक-एक सिर काटकर हवन कुंड में आहुति देकर शिव को अर्पित करना शुरू किया.
  • दसवां और अंतिम सिर कट जाने से पहले शिव भोले ने प्रकट होकर रावण का हाथ पकड़ लिया, साथ ही सभी सिरों को पुनस्र्थापित कर शिव ने रावण को वर मांगने के लिए कहा.
  • रावण ने कहा, मैं आपके शिवलिंग स्वरूप को लंका में स्थापित करना चाहता हूं
  • आप दो भागों में अपना स्वरूप दें और मुझे बलशाली बना दें
  • शिवजी ने तथास्तु कहा और लुप्त हो गए
  • लुप्त होने से पहले शिव ने शिवलिंग स्वरूप दो चिह्न रावण को देने से पहले कहा कि इन्हें जमीन पर ना रखना
  • रावण दोनों शिवलिंग लेकर लंका के चला
  • रास्ते में ‘गौकर्ण’ क्षेत्र बैजनाथ में पहुंचने पर रावण को लघुशंका का आभास हुआ.
  • उसने ‘बैजु’ नाम के एक ग्वाले को सब बात समझाकर शिवलिंग पकड़ा दिए और शंका निवारण के लिए चला गया
  • शिवजी की माया के कारण बैजु उन शिवलिंगों के भार को अधिक देर तक ना सह सका और उन्हें धरती पर रखकर पशु चराने चला गया

इस तरह दोनों शिवलिंग वहीं स्थापित हो गए. जिस मंजूषा में रावण ने दोनों शिवलिंग रखे थे, उसके सामने जो शिवलिंग था, वह ‘चन्द्रताल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और जो पीठ की ओर था, वह ‘बैजनाथ’ के नाम से जाना गया. मंदिर के प्रांगण में कुछ छोटे मंदिर हैं और नंदी बैल की मूर्ति है. नंदी के कान में भक्तगण मन्नत मांगते हैं.

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