देशभक्ति का भाव जागृत करना, वेद का प्रचार करना, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना तथा समाज में भाईचारा व एकता की भावना को बढ़ावा देना वर्तमान समय में वेदों की शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए : आचार्य देवव्रत
March 4th, 2019 | Post by :- | 260 Views

चंडीगढ़, ( महिन्द्र पाल सिंहमार )      ।  हरियाणा के झज्जर में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को गुरूकुल महाविद्यालय, झज्जर के वार्षिक उत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि देशभक्ति का भाव जागृत करना, वेद का प्रचार करना, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना तथा समाज में भाईचारा व एकता की भावना को बढ़ावा देना वर्तमान समय में वेदों की शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

आचार्य देवव्रत ने महाशिवरात्रि और आर्य समाज के उदभव पर बोलते हुए कहा कि जीवन में अनेक छोटी-बड़ी घटनाएं होती हंै। इन घटनाओं को देखने का भाव ही सामान्य व महापुरूषों के बीच अंतर को स्पष्ट करता है। महापुरूष इन घटनाओं से निष्कर्ष निकालकर आने वाली पीढिय़ों को नई दिशा देते हैं। धीर-गंभीर योगी महर्षि दयानंद अपने लक्ष्य से नहीं भटके बल्कि उस दौर की सभी बुराईयां जिनमें पहला देश का गुलाम होना, दूसरा बहन-बेटियों पर सतीप्रथा जैसी कुरीतियों से जुल्म व पढ़ाई-लिखाई से वंचित करना, तीसरा समाज में जात-पात की भावना तथा चौथी, अंध विश्वास व आडंबरों पर वेदों के आधार पर वैज्ञानिक ढंग से चोट की।

उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि का दिन हम सबके लिए स्मरण, ज्ञान अर्जन व प्रेरणा का दिन है। स्वामी दयानंद की शिक्षाओं व आर्य समाज के उद्देश्य के अधूरे कार्यों को पूरा करने की इस दिन से प्रेरणा लेनी चाहिए। वर्तमान समय की चुनौतियों से निपटने के लिए आर्य समाज की सीख आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि आर्य समाज का मूल उद्देश्य भारत के प्राचीन वैदिक गौरव को स्थापित करना, वेद की पताका लहराना व जाति-पाति को समाप्त कर समाज में समरसता लाना है। आर्य समाज की सीख में समस्त विश्व को सुखी देखना व अंध-विश्वास व पाखंड को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाप्त करना है।

आचार्य देवव्रत ने सत्यवीर प्रेरक द्वारा लिखी गई पुस्तक मेरा ग्राम पाबड़ा समूह का विमोचन भी किया।

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