कुछ दिन पहले शिमला से कांगडा फिर ऊना जाना हुआ फिर देखा…..
February 23rd, 2020 | Post by :- | 191 Views

कुछ दिन पहले शिमला से कांगडा फिर ऊना जाना हुआ फिर देखा, हिमाचल प्रदेश में बेसहारा गोवंश की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गौवंश दिन रात सड़कों पर घूमते रहते हैं जिस कारण सड़क दुर्घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। ये दुर्घटना केवल उन मानवों की नही है जो महंगी से महंगी गाड़ी में बैठे होते है। यह उन वेसहारा जीवों की भी दुर्घटना है जो हम कर जाते है और सोचते नही है। सडक दुर्घटना में अनगिनत मवेशियों की भी जाने गई है। एक समय हम गाय को माता के रूप में पुजते थे। लेकिन आखिर जहाँ वृद्ध आश्रमो की संख्या निरतंर बढती जा रही है। वहाँ गाय को नि:स्वार्थ रूप से माता मानने का तो प्रशन्न ही निरर्थक सिद्ध होता दिखता है। हम इन्सान इतने स्वार्थी हो गऐ हैं कि जब तक हमे किसी की जरूरत है तब तक तो उसका साथ देंगे लेकिन जब जरूरत खत्म उससे नाता खत्म। वैसी ही दशा आज उन जानवरों की है। जो बोल नही सकते, उनकी गलती इतनी है कि वह बस इस युग में वेजुवान जीव के रूप में पैदा हुए। गाय दूध दे रही है काम की लेकिन जब दूध देना बंद कर दिया उसको खुले में छोड़ दिया। बैल काम के थे तब तो कदर थी लेकिन जब उनकी महत्वपूर्णता कम हुई बाहार छोड दिया। हम इतने बुद्धिमान हो गऐ है कि आधुनिक युग में हमें लगता है कि हमारे साथ कभी बुरा नही होना चाहिए बाकी के साथ कुछ भी हो हमें फर्क नही पड़ता। कुछ बुद्धिमान तो ऐसे भी है जो कहते है कि गाय को बचाने का काम तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के लोगों का है। लेकिन हम अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे ये बात हम नही मान रहे है हमें मूफ्त में खाने की आदत पड़ चुकी है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट में पशुओं को आवारा छोड़ने के अपराध में जुर्माने का भी प्रावधान है। लेकिन फिर भी बेसहारा पशूओं की संख्या में वृद्धि हुई है। तब हम सोच सकते है कि कानून कितने भी बना लो जब तक हमारी मानसिकता परिर्वतन नही होती तब तक कुछ होने वाला नही है।

सावधानी से चलो, जानवरों को बचाओ!

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