पांच अगस्‍त को शिमला में आक्रोश रैली, अब निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे किसान बागवान, सचिवालय के बाद होगा हिमाचल विधानसभा का घेराव #news4
August 2nd, 2022 | Post by :- | 96 Views

शिमला : किसानों और बागवानों के 27 संगठनों के संयुक्त किसान मंच ने तेवर कड़े कर दिए हैं। मंच ने खासकर सेब बागवानी के मुद्दे पर निर्णायक जंग लड़ने का ऐलान किया है। पांच अगस्त को राज्य सचिवालय के बाहर आक्रोश रैली होगी। इसमें हजारों लोगों के हिस्सा लेने का दावा जताया गया है। अगर सरकार ने मंच की 20 सूत्रीय मांगों को स्वीकार कर लागू नहीं की तो मानसून सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव होगा। मंच के संयोजक हरीश चौहान, सह संयोजक संजय चौहान ने शिमला में पत्रकार वार्ता में यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल अपना स्टैंड स्पष्ट करें। वे किसानों, बागवानों के मुद्दों को घोषणा का हिस्सा बनाएं।

सरकार ने कुछ मांगे मानी, नहीं हुआ क्रियान्वयन

मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ बैठक के बाद कुछ मांगों को मान लिया है। लेकिन इन पर क्रियान्वयन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी एचपीएमसी में सेब की एक पेटी जीएसटी के 16 फीसद के साथ पुरानी दर 75 रूपये 35 पैसे पर मिल रही है। छह फीसद जीएसटी के बदले सबसिडी का प्रावधान लागू नहीं हुआ है। उन्होंने खुले बाजार से पेटी और ट्रे खरीदने पर छह फीसद जीएसटी कम करने के प्रावधानों को सरल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी उत्पादों की पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी नहीं लगना चाहिए।

अफसर नहीं है गंभीर

मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 27 विधानसभा क्षेत्रों में सेब संकट से जूझ रहा है। लेेकिन सरकार के अफसर इसके प्रति गंभीर नहीं है। वे बागवानों का मजाक उड़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी में बागवानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। लेेकिन ऐसा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि एक पूर्व अधिकारी ने तो बागवानी प्रोजेक्ट का लाभ केवल अपने लिए उठाया।

कांग्रेस ने भी नहीं किया भला

संयोजिक ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकारों ने भी बागवानों को भला नहीं चाहा। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब के समर्थन मूल्य में चवन्नी और अठन्नी ही बढ़ाई। मौजूदा सरकार ने एक रूपये बढ़ाया है। जबकि उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है। दवाओं, खाद के दामों में कई गुना बढ़ाेत्तरी हुई है। बावजूद इसके कैल्शियम नाइट्रेट नहीं मिल पा रही है।

 32 वर्षों के बाद हो रहा आंदोलन

मंच से जुड़े संगठनों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 32 वर्षों बाद किसान- बागवान आंदोेलन कर रहे हैं। इससे पहले 1987 में और फिर 1990 में आंदोलन हुआ था।

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