9 वर्ष के बाद नाहन पहुंचे सिरमौर रियासत के वंशज लक्ष्यराज प्रकाश, राजसी अंदाज में हुआ मंगल तिलक #news4
April 12th, 2022 | Post by :- | 170 Views

नाहन : सिरमौर रियासत के वंशज ( मुखिया) लक्ष्यराज प्रकाश 9 साल बाद शाही महल नाहन में पहुंचे। 16 मई 2013 को नाहन के शाही महल में लक्ष्यराज का मंगल तिलक हुआ था। राजशाही ठाठ-बाट में 9 साल के बालक को रियासत का “महाराजा” बनाया गया था। पिछले महीने 18 साल का होने के बाद “लक्ष्यराज प्रकाश” मंगलवार को जब नाहन पहुंचा, तो शाही महल की रौनक भी लौट आई थी। लक्ष्यराज के तिलक के बाद मंगलवार को दूसरी बार शाही महल के ऊपर सिरमौर रियासत का ध्वज फहराते हुए देखा गया। जयपुर से अधिकारी पिछले दो दिन से शाही महल में राजघराने के वंशज लक्ष्यराज प्रकाश के स्वागत की तैयारी के लिए पहुंच गए थे।

चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक हवाई मार्ग से पिता नरेंद्र सिंह भी बेटे लक्ष्यराज के साथ पहुंचे। मीडिया के सवालों का जवाब लक्ष्यराज ने बेहद ही मासूमियत से देने का प्रयास किया। एक सवाल के जवाब में लक्ष्यराज ने कहा कि वह चाहते हैं कि शाही महल आम जनता के लिए हमेशा खुला रहे। एक अन्य सवाल के जवाब में वो मुस्कुराते हुए अपने पिता की तरफ देखने लगे, तो पिता ने कहा आप जो सोचते हैं, वह बताएं। शाही महल के मुख्य कपाट पर रियासत के 44वे महाराजा “लक्ष्यराज प्रकाश” का स्वागत किया गया। लक्ष्यराज के कस्टोडियन व राज परिवार के सदस्य कंवर अजय बहादुर सिंह ने जब कहा, “वेलकम हिज हाइनेस” तो मुस्कुराते हुए उनके पांव छूकर आशीर्वाद लिया। महल के परिसर में पुरोहित रमेश मिश्रा ने लक्ष्य राज का तिलक कर स्वागत किया। 16 मई 2013 को भव्य तरीके से लक्ष्यराज का “राजतिलक” किया गया था।

इसी के चलते ही जयपुर के राजघराने व प्रकाश वंशजों ने राज तिलक की बजाय मंगल तिलक का निर्णय लिया था। लक्ष्यराज प्रकाश के बड़े भाई पदमनाभ को जयपुर के राजघराने का वारिस घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि लक्ष्यराज प्रकाश को सिरमौर रियासत के प्रकाश वंश का मुखिया घोषित करने से पहले उनके गोत्र को भी बदला गया था। मंगल तिलक के दौरान लक्ष्यराज प्रकाश को गुरु गोविंद सिंह की वो तलवार भी भेंट की गई थी, जो सिरमौर रियासत के शासक मेदनी प्रकाश को 1685 में गुरु गोविंद सिंह जी ने नाहन आने के दौरान भेंट की थी। पिता नरेंद्र सिंह ने बताया कि लक्ष्यराज इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहा है। वह अक्सर ही नाहन आने के लिए उतावला रहता था। इस बार छुट्टियों में जयपुर आया हुआ था, तो नाहन आने का आग्रह किया। चूंकि वह प्रकाश वंश का मुखिया है, लिहाजा लक्ष्य की नाहन के प्रति जिम्मेदारी भी बनती है। उल्लेखनीय है कि मंगल तिलक के दौरान राज परिवार के सदस्य व पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह को लक्ष्यराज प्रकाश का कस्टोडियन भी घोषित किया गया था।

उल्लेखनीय है कि 16 मई 2013 को लक्ष्यराज के शाही महल में मंगल तिलक के दौरान देश की कई नामी हस्तियां पहुंची थी। इसमें डिंपल कपाड़िया भी शामिल थी। पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह का कहना था कि मंगल तिलक के बाद एक मर्तबा पहले भी लक्ष्यराज नाहन यहां आया था, लेकिन अब वह 18 साल का हो चुका है। दीगर है कि राजस्थान के जयपुर राजघराने की राजमाता पद्मिनी देवी का नाहन में मायका है। अंतिम शासक राजेंद्र प्रकाश की बेटी पद्मिनी देवी ने अपने छोटे नाती को सिरमौर रियासत का वारिस घोषित किया था। 1934 में सिरमौर रियासत के अंतिम राजा राजेंद्र प्रकाश का राजतिलक हुआ था। इसके बाद ठीक उस तरह की रिवायत को 2013 में दोहराया गया। 1964 में महाराजा राजेंद्र प्रकाश के देहांत के बाद शाही महल सुनसान हो गया था। उसके बाद 2013 में लक्ष्यराज प्रकाश को सिरमौर रियासत का महाराजा बनाया गया।

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