आखिर किसने रची देश के प्रधान मंत्री के लिए साजिश … #news4
January 6th, 2022 | Post by :- | 132 Views

आखिर किसने रची देश के प्रधान मंत्री के लिए साजिश

शक के घेरे में पंजाब के मुख्य मंत्री, डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी का नाम सबसे ऊपर है।

पहले जानते हैं कि आखिर मामला क्या था..?
प्रधानमंत्री बठिंडा पहुंचे जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर से हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाना था। बारिश और खराब विजिबिलिटी के चलते करीब 20 मिनट तक मौसम साफ होने का इंतजार किया। जब मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो यह तय किया गया कि वह सड़क मार्ग से राष्ट्रीय मेरीटर्स मेमोरियल का दौरा करेंगे, जिसमें 2 घंटे से अधिक समय लगेगा।
एसपीजी नें पंजाब पुलिस से रूट की जानकारी मांगी. डीजीपी पंजाब द्वारा सड़क मार्ग सुझाया गया, और सड़क क्लीयर होने की हरी झंडी दी गई। हालांकि एक दिन पहले भी वैकल्पिक सड़क मार्ग तैयार रखने के लिए पंजाब सरकार को निर्देश दे दिए गए थे। सड़क साफ होने का सिग्नल मिलते ही काफिला चल पड़ा।

रैली से 10 किलोमीटर पहले एक ओवरब्रिज पर प्रधान मंत्री का काफिला प्रदर्शन कारियों नें रोक लिया। पीएम 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फंसे रहे। यह पीएम की सुरक्षा में एक बड़ी चूक थी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और यात्रा की योजना के बारे में पंजाब सरकार को पहले ही बता दिया गया था। प्रक्रिया के अनुसार उन्हें रसद, सुरक्षा के साथ-साथ आकस्मिक योजना तैयार रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी होती है। साथ ही पंजाब सरकार को सड़क मार्ग से काफिले को जाने के लिए किसी भी आंदोलन को वहां होने से रोकना चाहिए था। उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं था।
लौटकर हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री को कहना पड़ा कि अपने मुख्यमंत्री से कहना कि धन्यवाद, मैं जिंदा पहुंच गया।

जिस पंजाब पुलिस को सड़क खुलवानी थी, वह प्रदर्शन कारियों के साथ सड़क पर ही चाय पकौड़े खाकर ठहाके लगा रही थी। ऐसा यूं ही नहीं होता, इसके लिए उच्च स्तरीय निर्देश रहे होंगे।

जमीन की अपेक्षा दूर से किसी पुल को निशाना बनाना बहुत आसान होता है। यही कारण है कि मोदी को पुल पर रोका गया। यह क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर था, ऐसे में ड्रोन हमला भी किया जा सकता था। रूट की जानकारी सिर्फ पंजाब पुलिस के अधिकारियों को थी, ऐसे में प्रदर्शनकारी वहां स्वतः ही नहीं आए, बल्कि लाए गए।

सबसे बड़ी बात कि प्रोटोकॉल के मुताबिक पंजाब के सीएम, डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी को प्रधान मंत्री के साथ रहना था, जबकि तीनों ही गायब थे। डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी की खाली गाड़ियां काफिले में थी, मगर खुद गायब थे। यही सबसे बड़ी वजह है कि माना जा रहा है, कि इन तीनों को किसी बड़ी अनहोनी की जानकारी थी। या ये लोग खुद साजिश का हिस्सा थे।

मुख्य मंत्री चन्नी नें बाद में बहाना लगाया कि वह इसलिए काफिले में नहीं आए क्योंकि उनके पीए के सहयोगी को कोरोना हो गया था। मगर संबेदनहीनता देखिए, न खुद को आइसोलेट किया, न ही समाजिक दूरी बनाई, यानी यह महज वहाना था।

सूत्रों का कहना है कि एसपीजी नें कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी और गोली चलाने की अनुमति मांगी। मगर प्रधान मंत्री नें ऐसा कुछ भी करने से बेहतर, वापिस लौटना समझा.

कुल मिलाकर चाहे खालिस्तान लिबरेशन आतंकियों की साजिश रही हो, चाहे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की। मगर पंजाब के बड़े औहदेदार भी इस साजिश का हिस्सा रहे होंगे। इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए, और दोषी लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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