आखिर पाकिस्तानी और बंग्लादेश के मुस्लिम समुदाय कुछ दलों को पसंद क्यों है..?
December 22nd, 2019 | Post by :- | 155 Views

वास्तव में असम, पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में करोड़ों बंग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान के नागरिक बस गए हैं। गुपचुप तरीके से इन्हें वोट देने तक का अधिकार तक दे दिया गया है। यह इतना बड़ा वोट वैंक है कि बंगाल जैसे राज्य में तो, सरकार बनाना इन्हीं के हाथ में है। यही कारण है कि कुछ दलों को ये घुसपैठिए भी प्रिय लगने लगे हैं। हिंसा करने बाले यही करोड़ों लोग हैं जो देश में घुसपैठ कर चुके हैं और इन्हें यहां से निकलना होगा । कुछ दल अपने देश को नकार कर, इन घुसपैठियों का साथ दे रहे हैं।

देश के विभाजन के बाद 1951 की जनगणना में पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की कुल जनसंख्या 49,25,496 थी जो कि 2011 की जनगणना में बढ़कर 2,46,54,825 यानी लगभग पांच गुना हो गई। भारत के जनगणना आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 2011 में हिंदुओं की 10.8 प्रतिशत दशकीय वृद्धि की तुलना में मुस्लिम जनसंख्या की दशक वृद्धि दर 21.8 प्रतिशत है। इस तरह, हिंदुओं की तुलना में मुसलमानों की दशकीय वृद्धि दर दोगुने से भी अधिक है।
1951 के बाद से हर जनगणना में पश्चिम बंगाल के औसत की तुलना में हिंदुओं की दशकीय वृद्धि दर कम ही रही है। इसी तरह, यह बात ध्यान में आती है कि मुसलमानों की दशकीय वृद्धि दर हमेशा से हिंदुओं की वृद्धि दर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की औसत वृद्धि दर की तुलना में काफी अधिक रही है। हिंदू जनसंख्या की वृद्धि दर के मुकाबले मुस्लिम जनसंख्या 1981 में 8.18 प्रतिशत अंक अधिक, 1991 में 15.80 अंक अधिक, 2001 में 11.68 अंक अधिक और 2011 में 11 अंकों की अधिक दर्ज की गई। यही नहीं, वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर प्रदेश की औसत दशकीय वृद्धि की तुलना में 7.87 अंक अधिक थी। अगर जनसांख्यिकीय नजरिए से देंखे तो इस तरह लगातार एक लंबे समय तक वृद्धि दर में इतना अधिक अंतर स्वाभाविक नहीं है, बल्कि गुपचुप तरीके से बंग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान से इस समुदाय के लोग यहां बस गए हैं।
जहां तक हिंदू समुदाय की बात है, तो कोई दूसरा हिंदू देश नहीं है। ऐसे में आखिर हिंदू किसी दूसरी जगह शरण नहीं ले सकते, जबकि 59 मुस्लिम देश हैं, ऐसे में किसी देश के मुस्लिम समुदाय को अगर शरण लेनी ही हो ,तो वहां ली जा सकती है।

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