जूस निकाले जाने के बाद बचा सेब भी रखेगा सेहतमंद, अब दोहरी कमाई का मिलेगा मौका #news4
December 23rd, 2021 | Post by :- | 79 Views

सोलन : आम के आम गुठलियों के दाम। मुहावरा पुराना है, लेकिन इसे नया आयाम दिया है सोलन जिला स्थित डा. वाइएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने। विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे सेब का जूस निकालने के बाद बचे पोमेस यानी सेब के भीतरी हिस्से (पोमेस) से कई खाद्य वस्तुएं बनाई जा सकती हैैं। विश्वविद्यालय के फूड साइंस एंड टेक्नालाजी विभाग ने केक, बिस्किट, पोमेस पाउडर व जैम जैसे उत्पाद तैयार किए हैं। लैब में एप्पल पेक्टिन केमिकल भी तैयार किया है। इस केमिकल से जेली बनाई जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश सहित पहाड़ी राज्यों में सेब का व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। सेब से जूस निकालने के बाद जो पोमेस शेष रह जाता है, उसे अधिकांशत: फेंक दिया जाता है। विश्वविद्यालय में इस पर शोध किया गया। पोमेस को पहले फ्रिज में रखना होता है, ताकि यह खराब न हो। इसके बाद भी इसमें से बचा जूस निकालकर सिलेरी यानी पल्प तैयार किया जाता है। पल्प बनाए जाने के बाद इसमें स्वाद अनुसार चीनी डाली जा सकती है। निश्चित तापमान में गर्म करने के बाद इससे जैम व चटनी बनाई जा सकती है। पोमेस को उच्च तापमान पर सुखाने के बाद पाउडर तैयार किया जाता है। इस पाउडर से खाद्य पदार्थ बनाए जा सकते हैैं।

छुपा है स्वास्थ्य का खजाना

एप्पल पोमेस पाउडर स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। इसमें वे तमाम तत्व मौजूद रहते हैं, जो एक सेब में होते हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रोल और हृदयाघात की आशंका को कम करता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी यह कारगर है। विटामिन सी व कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। खास बात यह है कि पोमेस पाउडर में एंटी कैंसर तत्व भी होते हैं।

बेरोजगार लगा सकते हैं यूनिट

यदि कोई बेरोजगार एप्पल पोमेस से संबंधित यूनिट स्थापित करना चाहता है तो नौणी विश्वविद्यालय उसकी पूरी सहायता करेगा। विश्वविद्यालय 40 हजार रुपये में तकनीक बेचेगा। संबंधित कंपनी या व्यक्ति के साथ समझौता ज्ञापन किया जाएगा। उत्पादन व मशीनरी से संबंधित सभी प्रकार की तकनीक भी मिलेगी। आठ से 10 लाख रुपये खर्च कर यूनिट स्थापित की जा सकती है। यूनिट लगाने के लिए ड्रायर, चिलिंग वैन, जूस निकालने की मशीन, सिलेरी बनाने के लिए मिक्सचर की आवश्यकता होती है। आठ से 10 लोग इस यूनिट में काम कर सकते हैं।

की जा सकती है दोहरी कमाई : डाक्‍टर केडी शर्मा

फूड साइंस एंड टेक्नोलाजी नौणी विश्वविद्यालय के विभाग अध्‍यक्ष डा. केडी शर्मा ने कहा एप्पल पोमेस की यूनिट लगाकर दोहरी कमाई की जा सकती है। जूस को बेचा जा सकता है और इसके बाद जो पोमेस रह जाता है, उससे कई प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैैं। सैंपल के तौर पर लैब में कई उत्पाद तैयार किए गए हैैं।

बेरोजगारों को मिलेगा तकनीक का लाभ

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. परविंदर कौशल का कहना है हिमाचल में सेब का काफी अधिक उत्पादन होता है, इसलिए कच्चे माल की कमी नहीं है। एप्पल पोमेस व इससे बनने वाले उत्पाद के लिए विश्वविद्यालय हर संभव सहायता करेगा। तकनीक का लाभ देशभर के बेरोजगार युवाओं को मिल सकता है।

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