अनुराग बताएं कि उनके राज्य वित्त मंत्री बनने का प्रदेश को क्या मिला है लाभ: राणा
February 23rd, 2020 | Post by :- | 153 Views

विधानसभा सत्र से ठीक पहले कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा ने फिर से केन्द्रीय राज्य वित्त मंत्री सांसद अनुराग ठाकुर को घेरते हुए सवाल खड़ा किया है कि अनुराग ठाकुर बताएं कि उनके केन्द्रीय वित्त मंत्री बनने का प्रदेश की जनता को क्या लाभ हुआ है। राणा ने कहा कि केन्द्रीय राज्य वित्त मंत्री प्रदेश की जनता को बताएं कि जब से उन्होंने वित्त मंत्रालय का राज्य प्रभार संभाला है, तब से लेकर अब तक हिमाचल प्रदेश के हित में कितना वित्त जारी किया है। वह कौन से प्रोजेक्ट हैं जो उन्होंने प्रदेश के लिए वित्त राज्य मंत्री रहते हुए लाए हैं। राणा ने कहा कि दरअसल में हाई प्रोफाइल नेता अनुराग ठाकुर अपनी जीत के गरुर के शरुर से अभी तक बाहर ही नहीं निकल पाए हैं।

अनुराग को सरकार से ईरश्या
इसके अलावा अब हिमाचल प्रदेश की बीजेपी से अपने हितों को लेकर आरपार की जंग छेड़े हुए अनुराग ठाकुर व्यक्तिगत खुन्नस के चलते प्रदेश के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट लाना ही नहीं चाहते हैं। वैसे भी हवाई बातें व हवाई किले बनाना अनुराग ठाकुर की राजनीतिक अदा है। जिसके चलते उनके केन्द्रीय राज्य वित्त मंत्री बनने का न तो प्रदेश की जनता को कोई लाभ हुआ है और न ही वह प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मिले प्रचंड जनादेश के प्रति वह कोई न्याय कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से उनका सियासी व्यवहार यह साबित कर चुका है कि वह बतौर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सत्ता को नहीं पचा पा रहे हैं। हालांकि जमीन से जुड़े नेता जयराम ठाकुर अपने सादे व साधारण व्यवहार के चलते इनके प्रति न कोई राजनीतिक रंजिश रखने का इरादा रखते हैं और न ही कभी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सियासी संवाद व व्यवहार से कभी ऐसा झलका है लेकिन शिमला में सरेआम मंच पर अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री से खराब व्यवहार करने व उन्हें नीचा दिखाने का मामला अनुराग ठाकुर की व्यक्तिगत रंजिश को जगजाहिर कर गया है।

वोल्वो में बैठ फोटो खिंचवाना सिर्फ विज्ञापन प्रोपागंडा
सुर्खियों में बने रहने के लिए सुटेड-बुटेड नेता अनुराग ठाकुर बसों में सफर करने के फोटो वायरल करवाकर खुद को आम आदमी का नेता बताने का असफल प्रयास कर रहे हैं लेकिन अनुराग ठाकुर को जानने वाले लोग बाखुबी जानते हैं कि अनुराग ठाकुर का जमीनी राजनीति से कोई नाता नहीं है। शायद यही कारण है कि उन्होंने अभी तक एक भी चुनाव अपनी उपलब्धियों पर नहीं लड़ा है। कभी उन्होंने अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय धूमल जी के नाम पर चुनाव लड़ा तो कभी मेहरुम नेता अरुण जेटली से नजदीकियों का वास्ता देकर चुनाव में उतरे तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनावी नैया पार की है और अब जब उनको केन्द्रीय राज्य वित्त मंत्री बना दिया गया है तो अपनी सत्ता के रुआब व दवाब में सरकारी अमले से प्रोटोकॉल के नाम पर अपना सम्मान करवाने में व सरकारी सुख-सुविधाएं हासिल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। राणा बोले कि इतना सब कुछ होते हुए भी प्रदेश की बीजेपी अनुराग को लेकर खामोश क्यों है यह समझना मुश्किल है।

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हालांकि केन्द्रीय होम मिनीस्टर अमित शाह अपने अधिकारिक बयान में सपष्ट कर चुके हैं कि गाली व गोली जैसे नारों के कारण दिल्ली में बीजेपी हारी है लेकिन हैरानी यह है कि प्रदेश बीजेपी की सरकार व संगठन इस मामले पर रहस्मयी चुप्पी धारण किए हुए है। राणा ने देवभूमि मिरर से बातचीत में कहा कि इसके मायने क्या प्रदेश की जनता यह समझे कि गोली और गाली की सियासी भाषा को प्रदेश की बीजेपी मूक समर्थन दे रही है? राणा ने कहा कि सियासत में खराब व्यवहार व खराब बोली-भाषा हिमाचल जैसे शिक्षित व संस्कारित सियासी परिवेश के लिए कतई सही नहीं है। बीजेपी को आगे आकर इस मामले पर अपना स्टैंड जनता के सामने क्लीयर करना होगा कि क्या प्रदेश की बीजेपी गोली और गाली की भाषा बोलने वालों व खराब व्यवहार करने वालों के साथ है या फिर साफ सुथरी राजनीति करने की पक्षधर है। क्योंकि बीजेपी खुद को साफ सुथरी राजनीति का पक्षधर होने का दावा करके खुद को ही महिमामंडित करती है। इसलिए इस मामले पर भी बीजेपी को अपना स्टैंड प्रदेश की जनता के समक्ष क्लीयर करना जरुरी है।

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