कोरोना के अलावा ये 11 वायरस हैं सबसे खतरनाक, पूरी दुनिया में मचाया कोहराम
April 6th, 2020 | Post by :- | 195 Views

देश दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है। देश में रोजाना कोरोना से संक्रमित लोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी वायरस के कारण पुरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। इससे पहले भी ऐसे ही कई वायरस आ चुके हैं। जिनसे हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। आपको बता दें कि साइंटिफिक अमेरिकन मैगजीन के अनुसार धरती पर वैज्ञानिकों ने करीब 6 लाख ऐसे वायरस खोज निकाले है जो जानवरों से इंसानों के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। जानें ऐसे ही कुछ खतरनाक वायरस के बारे।

सार्स

इस वायरस को कोरोना वायरस का पूर्वज माना जाता है। यह वायरस भी चीन के गुआंगडांग प्रांत से आया था। यह वायरस चमगादड़ो से इंसानों में पहुंचता है। इस वायरस के कारण 2 साल में 26 देशों के करीब 8 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

मर्स
यह वायरस भी कोरोना वायरस की ही फैमिली का माना जाता है। इसके बारे में पहली बार 2012 में पता चला जब ये सउदी अरब में फैला। इस वायरस से ग्रसित व्यक्ति को निमोनिया और कोरोना वायरस के लक्षण हो जाते हैं। इस वायरस में 40 से 50 फीसदी लोगों की मौत हो जाती हैं।

मारबर्ग वायरस
इस वायरस को साथ 19676 में खोजा गया था। यह वायरस जर्मनी की एक लैब से लीक हो गया था। यह वायरस बंदरों से इंसानों में आया था। जो व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होता है उसे तेज बुखार के अलावा शरीर के अंदर अंगों के खून निकलने लगता है। जिसके कारण व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

इबोला वायरस
यह वायरस भी जानवरों से इंसानों में फैलता है। इस वायरस के बारे में पहली बार 1976 में पता चला जब कॉन्गो और सूडान के कुछ लोगों की मौत इस वायरस के कारण हो गई। साल 2014 में अफ्रीका में भी यह बहुत ही खतरनाक तरीके से फैला था।

रैबीज
आमतौर पर यह वायरस पालतू कुत्तों के काटने से फैलता हैं। इस वायरस के बारे में 1920 में  पता चला। इस वायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा भारत और अफ्रीका में देखा गया हैं। अगर कुत्ते के काटने  पर सही समय पर इलाज नहीं कराया तो व्यक्ति की जान भी जा सकती हैं।

एचआईवी (HIV)

इसे दुनिया का सबसे खतरनाक वारयस कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इससे संक्रमित व्यक्ति के बचने को कोई चांस नहीं होते। इससे संक्रमित 96 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है। 1980 से लेकर अब तक एचआईवी से संक्रमित 3.20 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है।

स्मॉलपॉक्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1980 में इस वायरस को खत्म करने की मुहिम चलाई थी। बता दें कि 20वीं सदी में इस रोग से 30 करोड़ लोगों की जान चली गई थी।

हंता वायरस

कोरोना वायरस के बाद एक बार फिर चीन में इस वायरस के एक व्यक्ति की मौत हो गई। जिसके कारण ये एक बार फिर सुर्खियों में आ गया हैं। इस वायरस के बारे में पहली बार 1993 में पता चला था। जब अमेरिका में एक लड़का और उसकी मंगेतर इस वारस से संक्रमित होने के कारण मर गए थे। जिसके बाद कुछ ही महीनों में इस बीमारी के कारण 600 लोगों की मौत हो गई थी। यह वायरस चूहों के माध्यम से फैलता है।

इंफ्लूएंजा
अधिकतर इस वायरस का कोई न कोई नया वायरस सामने आ जाता है। जिसके कारण हर साल करीब 5 लाख लोग इस रोग के कारण मारे जाते हैं। साल 1918 में इसका नया वायरस स्पैनिश फ्लू आया था। जिसने दुनिया की 40 फीसदी लोगों को बीमार कर दिया था और 5 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी।

डेंगू
मच्छरों के काटने से फैलने वाले इस रोग से भारत भी अछूता नहीं रहा है। इस बीमारी के बारे में पहली बार 1950 में फिलीपींस और थाईलैंड में पता चला था। आज भी इस बीमारी के कारण कम से कम 20 फीसदी लोग मारे जाते हैं।

रोटावायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल इस रोग से करीब 4 लाख बच्चों की मौत हो जाती हैं। यह बच्चों के लिए खतरनाक वायरस है। इससे ग्रसित बच्चे को निमोनिया और डायरिया हो जाता है। इस बीमारी के 2 वैक्सीन बन चुके है।

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