मानों बैल कह रहे हो- नंदी करे पुकार,शंकर आ जाओ एक बार #news4
February 17th, 2022 | Post by :- | 221 Views

भराड़ी : आज के समय में जहां लोग बैलों ,गायों बछड़ों आदि को सड़कों पर बेसहारा छोड़ देते हैं, वही अपने अंतिम समय में भी एक व्यक्ति को अपने बैलो की चिंता सताती रही, कि मेरे जाने के बाद इन बैलों का क्या होगा। हम बात कर रहे हैं, घुमारवीं उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लुहारवी के गांव सलौंन मौण्डल की जहां एक व्यक्ति शंकर जिसे अपने अंतिम समय में भी इन बैलों की चिंता सताती रही थी। शंकर की 15 दिन पहले मौत हो गई है, उनकी पत्नी ने बताया कि जिस दिन इनकी मौत हुई उससे एक दिन पहले मेरे पति ने दोनो बैलों को पानी पिलाया व घास डालकर उनसे बतियाने लगा और उन्हें कहने लगा तुमने कई वर्षों से मेरा साथ दिया है।

अब बुढ़ापे में मैं तुम्हें दर-दर की ठोकरें खाने के लिये नहीं छोड़ सकता। मैं मरते दम तक तुम्हें रखूंगा पर सोचता हूं, कि मेरे मरने के बाद मेरी पत्नी तारा तुम्हारी देख-भाल कैसे करेगी। एक तो वह बीमार रहती है, और कोई सहारा भी तो नहीं है। एक बेटा है वह मानसिक रोगी है व दूसरा घर से कमाने निकला तो कोई अता पता ही नहीं कि वह कहां हैं। मैं 85 वर्ष का होने को आया हूं। पीठ पर हाथ फेरते ही शंकर बोला न जाने अब कितने दिन और जीना है। पत्नी तारा ने बताया कि उसके  दोनों हाथ गोबर से सने थे। बोली किससे बातें कर रहे हो। अभी आपको कुछ नहीं होना है। पत्नी तारा ने बताया कि शंकर की तबियत ठीक नहीं थी। न जाने क्यों उसे यह अहसास हो रहा था कि अब उसका आखिरी समय आ गया है। बैलों से शंकर को बहुत प्यार था। वैसे तो उसने अपने जीवन में कई बैलों की जोड़ियां रखी परंतु अब बुढ़ापे में इस जोड़ी से शंकर को बच्चों की तरह प्यार हो गया था। उनसे बिछड़ने की कल्पना मात्र से ही वह सिहर उठता था।

घर के आंगन में बैठा शंकर यही सोच रहा था कि उसके जाने के बाद इन बैलों का कौन बनेगा सहारा। 78 वर्षीय पत्नी तारा कैसे करेगी परवरिश। उसके साथ 42 वर्षीय बेटा जो मानसिक रोगी है। उसकी देखभाल कौन करेगा। बैल जिन्हें उसने प्राणों से ज्यादा प्यार किया है, उन्हें कौन पालेगा। पत्नी ने बताया कि उनके पति शंकर ने निर्णय कर लिया कि वह बैलों को खुले में छोड़ देगा। ताकि वह मुक्त हो सकें। फिर उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक इन बैलों ने उसका साथ दिया, तो क्या अब बुढ़ापे में इन्हें छोड़ देना सही होगा। खूंटे के पास पहुंच कर जैसे ही खोलने के लिये रस्सी को हाथ डाला वैसे ही उसने कहा कि शंकर महादेव के मंदिर के बाहर नंदी विराजमान है। भला कभी नंदी को दूर किया है शंकर महादेव ने। और बोलने लगे कि मैं भी नंदी को दूर नहीं करुंगा,भले नाम का ही शंकर हूं परंतु हूं तो शंकर। मैं नंदी को दूर नहीं करुंगा यह कहते-कहते आंगन में आकर गिर गए। पत्नी ने बताया कि वह दौड़ती हुई आई, देखा तो शंकर के मृत पड़े थे।

तारा ने अपने बेटे को आवाज लगाने लगी देखो तो तेरे पिता को क्या हुआ है। अभी तो बैलों से बात कर रहे थे। तारा देवी ने बताया कि उसी समय गोशाला में दोनो बैल एक साथ रंभाने लगे। मानो कह रहे थे।‘‘शंकर आ जाओ एक बार।‘‘ वही शंकर की पत्नी ने बताया कि उनके पति होते थे तो वह इनका पालन पोषण कर देते थे उनके साथ उनका मानसिक रोगी बेटा भी है जिस वजह से उसे इनका पालन पोषण करने में दिक्कत आ रही हैं। नेहा मानव सेवा सोसाइटी के संस्थापक पवन बरूर ने बताया कि वह इस गरीब परिवार की हर सम्भव मदद कर रहे हैं, उन्होंने लोगों से इस परिवार की मदद करने का आवाहन किया है, वही उन्होंने गौ सदन के लोगों से इन्हें गौसदन में रखने की भी अपील की है। वही गौसदन पड़यालग के प्रधान राम चंद बरूर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा फैसला लिया गया है कि बैलों के लिए गाय अभ्यारण्य नालागढ़ और ऊना रखने के लिए सुनिश्चित किए गए है, इसलिए वह इन्हें गौ सदन में नही रख सकते हैं। लेकिन इन्हें गाय अभ्यारण्य ले जाने का सारा खर्चा करने को तैयार है।

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