संस्थानों को बंद करने पर बिफरी भाजपा, कांग्रेस सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा #news4
December 21st, 2022 | Post by :- | 88 Views

शिमला  : प्रदेश सरकार की तरफ से 1 अप्रैल, 2022 के बाद पूर्व भाजपा सरकार की तरफ से खोले गए संस्थानों को बंद किए जाने का सिलसिला जारी है। भाजपा ने इसको लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके तहत जिन स्थानों पर नए संस्थान बंद किए गए हैं, वहां के एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को भाजपा ज्ञापन भेजेगी। वर्तमान सरकार जिस तरीके से संस्थानों को बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, उससे आने वाले दिनों में करीब 150 अतिरिक्त कार्यालयों के बंद होने की संभावना बढ़ गई है।

बदले की भावना से काम कर रही कांग्रेस सरकार : सुरेश कश्यप
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने पूर्व सरकार के समय में खोले गए ऐसे कार्यालयों के बंद करने पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि कांग्रेस सरकार बदले की भावना से काम कर रही है तथा उसका विकास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड के जो 32 डिवीजन और सब डिवीजन बंद किए गए हैं, उन सभी मंडलों में एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इनमें शिलाई, पांवटा साहिब, पच्छाद, रोहड़ू, सोलन, श्री रेणुका जी, शिमला ग्रामीण, सुजानपुर, सराज, सुलह, चुराह, रामपुर, घुमारवीं और झंडूता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को क्षेत्र की जनता को यह बताना चाहिए कि किन कारणों से संस्थानों को बंद किया गया है, इन कार्यालयों को बंद करके सरकार को क्या फायदा हुआ है या फिर जनता को नुक्सान हुआ है?

सरकार को महंगा पड़ेगा निर्णय : सतपाल सत्ती
हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि पूर्व सरकार की तरफ से खोले गए कार्यालयों को बंद करना वर्तमान सरकार पर भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो कार्यालय लोगों की सुविधा के लिए खोले गए थे, उनको बंद किया जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के इन निर्णयों का भाजपा विरोध करेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस मामले पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आग्रह किया।

बिना बजट व स्टाफ के खोले गए थे संस्थान : नरेश चौहान
प्रदेश सरकार के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान का आरोप है कि पूर्व सरकार ने बिना बजट व स्टाफ के चुनावी समय में धड़ाधड़ संस्थानों को खोला। इसके लिए न तो बजट उपलब्ध करवाया गया और न ही स्टाफ। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए खोले गए थे।

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