हिमाचल में भाजपा -बनाम भाजपा -बनाम भाजपा
October 6th, 2019 | Post by :- | 177 Views

एक तरफ प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अब तक की सबसे दयनीय स्थिति में हैं ,तो भाजपा भी उसी स्थिति में हैं | हिमाचल में भाजपा -बनाम भाजपा -बनाम भाजपा का जो खेल चल रहा है वह किसी की दूर दृष्टि से छिपा नहीं है | केंद्र सरकार ..या सीधा कह लें मोदी सरकार , की तरफ हर नेता टकटकी लगाकर देखे जा रहा है | और उन्ही के कामो का श्रेय लेने के लिए हर नेता लालाइत है | मानो वह नेता न होता , तो मोदी .. मोदी न होता …

बात कर लेते हैं अनुराग ठाकुर की ! ये बही अनुराग ठाकुर है , कुछ वर्ष पहले मात्र सांसद होने के बाबजूद भी हर नेता उनकी सभा में हाजरी भेजने को उताबले रहता था | तब अनुराग ठाकुर सिर्फ मात्र सांसद थे | या मुख्यमंत्री के बेटे … या भावी मुख्यमंत्री के बेटे … शायद यहां उनका बजन कुछ अधिक बढ़ जाता रहा होगा | आज अनुराग ठाकुर एक केंद्रीय मंत्री हैं .. और उसी मोदी सरकार के मंत्री , जिसके कामो की वाह- वही पर यहां के नेताओं की नेतागिरी चल रही है | आज मोदी सरकार के मंत्री मंडी और शिमला आते हैं , लेकिन कोई भी विधायक उनके कार्यक्रम में शामिल तक नहीं होता | मंडी में अनुराग ठाकुर के कार्यक्रम में मात्र सदर विधायक अनिल शर्मा पहुंचे , मगर भाजपा से लगभग विच्छेद से हो चुके अनिल भी मात्र गिने चुने मिनट ही गुजार पाए और लौट गए | शिमला में भी सुरेश भारद्वाज जी के कुछ समय की उपस्थिति के आलावा यही कुछ देखने को मिला | यही नहीं जो नेता प्रेम कुमार धूमल जी के समय , अनुराग ठाकुर से मिलने समीरपुर के चक्कर लगाया करते थे , वह भी यहां वहाने बनाकर परदे के पाछे ही रहे | तो क्या अनुराग ठाकुर के बढे हुए कद से कुछ नेता डरे हुए हैं ..?

बात करते हैं जगत प्रकाश नड्डा की .. तो नड्डा आज भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रिय अध्यक्ष हैं , कुछ महीनों में परं अध्यक्ष भी हो जायेंगे | आज नड्डा – भाजपा है .. और प्रदेश भाजपा भी नड्डा होने को लालाइत है | नारे , दरी , पोस्टर , झंडा उठाने बाले हर उस युवा के लिए , कोई गुट नहीं कोई धड़ेबाजी नहीं , यह युवा रात रात भर झंडे लगाकर आज भी नड्डा जी के हिमाचल आगमन पर उत्साहित है | नड्डा जी इस समय सत्ता के चरम आसान पर आसीन हैं | इससे आगे सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी ही है | लेकिन चार सीटों बाले राज्य के लिए वह कुर्सी सिर्फ एक ख्वाव ही हो सकती है | हालाँकि नड्डा जी के आगे अभी और बड़े बड़े नेता हैं | तो राष्ट्रिय अध्यक्ष के बाद नड्डा जी का क्या होगा ..?

भविष्य की चिंता सबको होती है, हम हिमाचली बैसे भी कल के लिए जीते हैं | आज भी याद है कि चूल्हे में रात को, गर्म राख में एक उपला दवाकर रख दिया जाता था, ताकि सुवह को आग जलाई जा सके | रात को आते की एक लोई बचाकर रख दी जाती थी , ताकि सुवह आता नरम गुंथे | यानी हम लोग भविष्य की चिंता न करें ऐसा कतई नहीं है |

अनुराग ठाकुर बेहद युवा नेता हैं , और जितनी ऊर्जा उनमें भरी है वह किसी से छिपी नहीं है | अगर भाजपा केंद्र में फिर एक पारी खेलती है , तो अनुराग ठाकुर को उस पारी के शीर्ष पर रखा जायेगा | जबकि दूसरी तरफ नड्डा जी के अध्यक्ष पद के बाद के सफर पर पुनः विचार जाता है | चार सीटों बाले राज्य से दो केंद्रीय मंत्री भी नहीं बनाये जा सकते , न ही प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नड्डा जी हैं | ऐसे में नड्डा जी को आखिर कुछ पीछे हटना ही होगा | मगर पीछे हटने पर भी उनके लिए फिलहाल कोई ऐसा पद नजर नहीं आ रहा जहां उन्हें पार्टी सम्मान से बिठा सके | ऐसे में या तो नड्डा जी संघ के कार्यकर्ता बने रहेंगे , या फिर किसी राज्य का राजयपाल हो सकते हैं | मगर उम्र का तकाजा , उन्हें राज्य्पाल नहीं होने देगा | तो क्या नड्डा जी प्रदेश में वापिसी कर सकते हैं …? शायद यही एक विकल्प आगे नजर आ रहा है |

अगर नड्डा जी प्रदेश में वापिसी करते हैं , तो जयराम जी का क्या होगा | निसंदेह यह एक बड़ा सवाल है | पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से प्रदेश में तरह तरह के प्रयोग किये जा रहे हैं | हालाँकि अभी तक इन प्रयोगों का कितना सफल परिणाम निकला है, यह तो सत्ता में बैठे लोग ही बेहतर तरीके से बता पाएंगे | लेकिन यह भी कटु सत्य है कि जयराम जी को हिमाचल में जितना शरीफ और ईमानदार नेता गिना जाता रहा है , उतना ही कमजोर शासक भी गिना जा रहा है | निसंदेह यह बात उनके समर्थकों को चुभ सकती है , मगर इतिहास गवाह है ,कि लेखक की कलम कभी सिंहासन का गुणगान नहीं करती है |

निसंदेह कोई राजनीती में आया है , तो बोलचाल की भाषा में वह समाज सेवा को आया होता है | मगर सच यही है कि पद और प्रतिष्ठा की ही चाहत होती है | ऐसे में प्रदेश में अगर भाजपा त्रिकोणीय स्थिति में आ जा रही हो , तो भाजपा के लिए ही कष्टकारी होगा | इस पुरे घटनाक्रम के अभी कुछ नायक और भी हैं , जिनके बिना शायद हिमाचल की सत्ता में कुछ भी पार पाना मुश्किल सा है | पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार जी और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल जी | साफ तौर पर धूमल जी के साथ वैचारिक तौर पर जुड़ा समुदाय , अनुराग ठाकुर के लिए ऊर्जा का स्त्रोत हो सकता है | जबकि शांता कुमार जी को गुरु मानने बाले जगत प्रकाश नड्डा जी के लिए भी एक बड़ा समुदाय , उम्मीद के नजरों से देख रहा है |
यहां से परिणाम कुछ भी सामने हों , लेकिन पटल पर यह जरूर नजर दौड़ाई जा सकती है , कि जिस प्रकार के घटनाक्रम प्रदेश में नजर आ रहे हैं , उससे अगले कुछ वर्षों में प्रदेश की राजनीती का परिदृश्य कैसा होगा | जिन बंधुओं को मेरा लेख बुरा लगा हो , उनसे भी अनुरोध है कि कृपया कुछ वर्ष इन्तजार जरूर कर लें , जिन्हे अच्छा लगे , उनका हार्दिक अभिनन्दन ..

Source: Facebook

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