हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है केक काटना
December 28th, 2019 | Post by :- | 1665 Views

किसे का जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह हो या फिर कोई और खुशी का अवसर क्यों ना हो, केक काटना लेटेस्ट फैशन बन गया है। कई लोग तो रात 12 बजे का खास इंतजार करते हैं। घर के बच्चे हमेशा इस बात को लेकर उत्साहित रहते हैं कि उन्हें अपने माता-पिता के लिए केक काटना है या भाई-बहन का जन्मदिन केक काटकर मनाना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केक काटना हिंदू धर्म में शुभ नहीं माना गया है। यानी आप पश्चिमी सभ्यता के चलते अशुभ कार्य करने लगे हैं। इसके पीछे कुछ ऐसे कारण है, जिनका सीधा संबंध हमारे शास्त्रों से हैं।

अंग्रेजियत के हावी होने की वजह से लोग उसी तिथि को अपना जन्मदिन समझ बैठते हैं जो कि अंग्रेजी कैलेंडर में मौजूद होती है। लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह कतई सही नहीं है। हिंदू वर्ष अलग होता है, बहुत से लोगों को तो हिंदू स्नातन कैलेंडर बारे भी जानकारी नहीं है।

लोग रात के बारह बजे जन्मदिन मनाना पसंद करते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय होने के बाद ही व्यक्ति को ऐसे शुभ कार्य करने चाहिए क्योंकि रात के समय वातावरण में रज और तम कणों की मात्रा अत्याधिक होती है और उस समय दी गई बधाई या शुभकामनाएं फलदायी ना होकर प्रतिकूल बन जाती हैं। सिर्फ कुछ ही शुभ मुहुर्त ऐसे होते हैं, जब रात को भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पश्चिमी संस्कृति के अनुसार जन्मदिन के अवसर पर केक पर मोमबत्ती लगाने और फिर बुझाने की प्रक्रिया को अपनाया गया है। जबकि हिन्दू संस्कृति में ना तो केक काटना शुभ है और ना ही मोमबत्ती को बुझाना अच्छा माना जाता है। ये दोनो ही अशुभ कारक माने जाते हैं।

हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि मोमबत्ती तमो गुण वाली होती है, उसे जलाने से कष्ट प्रदान करने वाली नकारात्मक ऊर्जाएं पैदा होती हैं। जिस प्रकार हिन्दू धर्म में ज्योति का बुझना सही नहीं माना गया वैसे ही मोमबत्ती को बुझाना भी नकारात्मकता का प्रतीक है,और यह एक अशुभ संकेत माने जाते हैं। इसलिए कभी भी जानबूझकर भी मोमबत्ती को नहीं बुझाना चाहिए। हिंदू स्नातन धर्म में दीप जलाना शुभ और बुझाना अशुभ माना जाता है।

इसी तरह शुभ कार्य के लिए रखे गए केक को चाकू से काटना भी शुभ नहीं माना गया है। किसी प्रकार का भी केक बिना अंडे के नहीं बनाया जा सकता है। जो लोग बिना अंडे के केक की बात करते हैं, वह महज व्यापारिक प्रतिष्ठान चलाने के लिए झूठ कहते हैं। हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार के मांस या अंडे को शुभ कार्य में वर्जित माना जाता है।

गलती तो खैर इंसान से होती ही है लेकिन जानबूझकर धर्म के विरुद्ध कार्य करना ना तो वर्तमान पीढ़ी के लिए सही है और ना ही भावी पीढ़ी के लिए
हिंदू धर्म में लड्डू हाथ से बटारे जाते हैं, हलवा, खीर बनाए जाते हैं और दिये जलाये जाते हैं । गाय को और लोगों को सात्विक भोजन कराने की परंपरा है।

केक काटना और मोमबत्ती बुझाना उल्टा नियम है, जो हिंदू धर्म में अशुभ है । हम जिस धर्म या कुल में पैदा हुए हैं, उसकी मर्यादा पालन जरूरी होता है,क्योंकि हमें इसीलिए उस जगह जन्म मिला होता है। मगर जब हम शुभ कार्यों में इस प्रकार के अपशगुन करते हैं, तब हमें इसके बुरे परिणाम भी झेलने पड़ते हैं।

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