क्या हंता वायरस भी भारतीयों के लिए कोरोना वायरस जैसा हो सकता है खतरनाक, जानें
March 25th, 2020 | Post by :- | 266 Views

कोरोना वायरस की महामारी के बाद अब चीन के युन्नान प्रांत में हंता वायरस से एक व्यक्ति की मौत हो गई जिससे वहां लोगों में डर बना हुआ है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने ट्विटर पर ये जानकारी दी। हंता वायरस को लेकर दुनिया भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हड़कंप मचा है। लोगों को डर है कि क्या अब उन्हें एक और वायरस से जंग की तैयारी करनी पड़ेगी? तनाव के इस माहौल में हंता वायरस के बारे में जानना बेहद जरूरी हो जाता है। यूएस सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक हंता वायरस के पनपने की अवधि छोटी होती है। इस लक्षण 1 सप्ताह से 8 सप्ताह के बीच नजर आते हैं। अमेरिका के सीडीसी के मुताबिक हंता वायरस असल में हंता वायरस पल्मोनेरी सिंड्रोम (एचपीएस) है जो कि चूहों के संपर्क में आने से फैलता है।

सवाल यह उठता है कि क्या चीन में एक शख्स की जान लेने वाले हंता वायरस से भारतीयों को भी परेशान होने की जरूरत है? जैसे चीन से आए कोरोना वायरस ने भारत के 500 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया, क्या वैसे ही हंता वायरस भी खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है?

यह भी जानना जरूरी है कि क्या पहले कभी भारत में हंता वायरस का मामला सामने आया है? इस प्रश्न का उत्तर है – हां। वैसे तो भारत में हंता वायरस से लोगों के संक्रमित होने के कई मामले सामने आए हैं लेकिन यहां हम उन केस की बात करेंगो जो काफी चर्चित हुए थे।

– नेचर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 2008 में तमिलनाडु में वेल्लोर जिले के इरुला समुदाय के 28 लोग इस वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इस समुदाय के काफी लोग सांप और चूहे पकड़ने का काम करते थे।

– डाउन टू अर्थ मैग्जीन के मुताबिक 1994 में सूरत में फैले प्लेग के दौरान इस वायरस को कोई केस सामने तो नहीं आया लेकिन अंदेशा जताया गया कि इस दौरान गुजरात के कई लोग इस वायरस के संपर्क में आए थे।

– 2016 में मुंबई में हंता वायरस की चपेट में आने से एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उसके फेफड़ों से रक्तस्त्राव हो रहा था। उसे बुखार, खांसी, बलगम जैसी दिक्कतें थीं। ये सभी इस वायरस से संक्रमित होने के लक्षण हैं।

हालांकि 15 से 20 प्रतिशत चूहे हंता वायरस से संक्रमित होते है। लेकिन फिर भी इंसान के इस बीमारी से संक्रमित होने की आशंका बेहद कम होती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यह वायरस धूप के संपर्क में आने के बाद थोड़ी ही देर में मर जाता है। इसके अलावा यह इंसान से इंसान में नहीं फैलता।

कैसे फैलता है हंता वायरस
सेंटर ऑफ डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक अगर कोई व्‍यक्ति चूहों की लार, मल-मूत्र या उनके बिल की चीजें वगैरह छूने के बाद अपनी आंख, नाक और मुंह को छूता है तो उसमें हंता वायरस का संक्रमण फैल सकता है। कोरोना वायरस की तरह हंता वायरस हवा में नहीं फैलता है।

वैसे तो हंता वायरस से संक्रमित होने की आंशका बहुत कम रहती है लेकिन इसकी चपेट में आने के बाद मृत्यु दर कोरोना वायरस की तुलना में काफी अधिक है।

सेंटर ऑफ डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन  (Centre for Disease Control and Prevention) ने अपनी वेबसाइट पर बताया है ‘घर के अंदर व बाहर चूहे हंता वायरस का संक्रमण फैलने की शुरुआती वजह बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्‍वस्‍थ भी है तो भी हंता वायरस के संपर्क में आने पर उसके संक्रमित होने का खतरा रहता है।’

लक्षण
हालांकि कोरोना वायरस और हंता वायरस के लक्षण काफी एक जैसे हैं। दोनों ही स्थिति में  बुखार, सिर में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बदन दर्द होता है। इसके अलावा हंता वायरस से संक्रमित होने पर पेट में दर्द, उल्‍टी, डायरिया भी हो जाता है। इलाज में देरी होने पर संक्रमित इंसान के फेफड़े में पानी भी भर जाता है।

कहां से हुई हंता वायरस की शुरुआत
हंता वायरस का पहला मामला चीन से नहीं है। पहली बार इस वायरस के संक्रमण का मामला मई 1993 में दक्षिण पश्चिमी अमेरिका से आया था। ये चार कोनों- एरिजोना, न्यू मेक्सिको, कोलोराडो और उटाह का क्षेत्र था। न्यू मेक्सिको में इस वायरस से एक युवा शख्स और उसकी मंगेतर की मौत हुई थी। सीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में कनाडा, अर्जेंटीना, बोलीविया, ब्राजील, चिली, पनामा, पैरागुए और उरागुए से भी इस तरह के मामले आने की पुष्टि की है।

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