कोरोना के कारण विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने पर अभी फैसला नहीं, केंद्र राज्यों से ले रही है फीडबैक
April 26th, 2020 | Post by :- | 131 Views

विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों और छात्रों की वापसी को लेर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने राज्यों से उनकी तैयारी और वापसी के बारे में उनकी राय मांगी है। केंद्र यह जानना चाहता है कि अगर भारतीय नागरिक आए और संबंधित राज्यों में भेजे गए तो उनको क्वारंटाइन करने और कोविड प्रोटोकॉल के तहत अन्य सुविधाओं का क्या इंतजाम है।

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिव ने राज्यों के अधिकारियों से बातचीत में उन्हें बताया है कि राज्य व केंद्र शासित राज्यों से बातचीत शुरू की गई है। यह जानकारी उन्होंने मुख्य सचिवों से बातचीत के दौरान उन्हें दी।

सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला राज्यों से उनकी तैयारी का फीडबैक मिलने के बाद किया जाएगा। गौरतलब है कि विदेश में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कोरोना संकट की वजह से फंसे हुए हैं। वे लगातार मांग कर रहे हैं कि उन्हें वापस लाया जाए। भारत विदेशी नागरिकों को उनके देश मे वापस भेज रहा है, लेकिन अपने नागरिकों को यही सलाह दी गई है कि फिलहाल वे जहां हैं, वहीं रहें। जब कोई फैसला होगा तो उन्हें बताया जाएगा।

वापस लाए जा सकते हैं विदेश में कोरोना से मरने वाले भारतीयों के शव
गृह मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि विदेश में कोरोना वायरस संक्रमण से जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्ड धारकों के शव भारत लाए जा सकते हैं, लेकिन संबंधित दिशानिर्देशों के सख्ती से पालन पर ही ऐसा संभव है। एक आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने कहा कि एयरपोर्ट अधिकारियों को इस संबंध में विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

इसके मुताबिक, ‘यह साफ किया जाता है कि भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्डधारकों के शवों और अस्थियों को लाने के संबंध में आव्रजन गतिविधियों की अनुमति कोविड-19 से निपटने में लगे विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों के दिशानिर्देशों के सख्ती से पालन करने और साथ ही इस संबंध में स्वास्थ्य और विदेश मंत्रालय से मिले अनापत्ति पत्र और स्वीकृति सौंपने पर निर्भर करेगी।”

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।