भक्ति / गायत्री मंत्र का जाप तेज आवाज में नहीं करना चाहिए, सूर्योदय के समय जाप करना होता है शुभ
April 19th, 2020 | Post by :- | 39 Views

माता गायत्री की प्रसन्नता के लिए गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र को सर्वश्रेष्ठ मंत्रों में से एक माना जाता है। इस मंत्र के जाप के लिए दिन में तीन समय बताए गए हैं। मंत्र जाप के समय को संध्याकाल कहा जाता है।

गायत्री मंत्र- ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

गायत्री मंत्र का अर्थ- सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का यह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

कब-कब कर सकते हैं गायत्री मंत्र जाप
गायत्री मंत्र के जाप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जाप शुरू किया जाना चाहिए। जाप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए। मंत्र जाप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले। सूर्यास्त से पूर्व मंत्र जाप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जाप करना चाहिए।

इन तीन समय के अतिरिक्त अगर गायत्री मंत्र का जाप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जाप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है।

इस मंत्र के जाप से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं

इस मंत्र के जाप उत्साह और सकारात्मकता मिलती है, त्वचा में चमक आती है, विचार पवित्र होते हैं, भगवान की ओर मन लगता है, नेत्रों में तेज आता है, क्रोध शांत होता है, ज्ञान वृद्धि होती है। रोज मंत्र जाप करने वाले व्यक्ति का स्वभाव शांत और आकर्षक होने लगता है।

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