कोरोना वायरस मुक्त हुआ जिला कांगड़ा, प्रशासन के इन कदमों से मिली सफलता
April 13th, 2020 | Post by :- | 330 Views

कोरोना वायरस की चपेट में जिला कांगड़ा सबसे पहले आया था। लेकिन प्रशासन और जनता की सूझबूझ से आज कांगड़ा में कोई भी व्यक्ति काेरोेना वायरस के पीड़ित नहीं है। जिला वासियों के लिए यह बहुत बड़ी राहत की खबर है। लेकिन अभी कुछ दिन और एहतियात बरतने की जरूरत रहेगी। जिला प्रशासन ने कुछ ऐसे कदम उठाए थे, जिस कारण लोगों की भीड़ को काबू कर लिया गया। जिला प्रशासन ने सबसे पहले धारा 144 लगाकर बड़ा कदम उठाया था। हालांकि तब प्रशासन की कुछ लोग आलोचना भी कर रहे थे। लेकिन अब शायद वही लोग प्रशंसा भी कर रहे होंगे।

डाॅ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में उपचाराधीन जिला कांगड़ा के एक संक्रमित मरीज को ठीक कर दिया है, जिसे शनिवार रात्रि ही कांगड़ा स्थित क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रशिक्षण केंद्र छेब में अगले आदेश तक आइसोलेशन में शिफ्ट कर दिया गया है। जिला कांगड़ा के साथ साथ जिला ऊना से आए तीन जमाती भी छेब में आइसोलेशन केंद्र में रहेंगे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में कोविड-19 के सिर्फ एक कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज चल रहा है।

काबिलेगौर है कि जिला कांगड़ा में पहला कोरोना संक्रमित मरीज 19 मार्च को कांगड़ा उपमंडल के लंज से आया था जो विदेश से लौटा था और उसे 20 मार्च को टांडा मेडिकल काॅलेज के कोरोना आईसोलेशन वार्ड में दाखिल करवाया गया था। इसके बाद 20 मार्च को ही शाहपुर की महिला जिला में दूसरी कोरोना संक्रमित मरीज सामने आई थी, इसे भी टांडा मेडिकल काॅलेज में दाखिल करवाया गया था। 23 मार्च को प्रदेश व कांगड़ा में उस समय सनसनी फैल गई थी, जब कोरोना संक्रमित तिब्बती समुदाय के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

टांडा मेडिकल काॅलेज में पहुंचने से पहले ही तिब्बती व्यक्ति की मौत हो गई थी और इसके आधार पर शहर के एक बड़े निजी अस्पताल को डाॅक्टर, स्टाफ व मरीज सहित क्वारंटाईन कर लिया गया था। तकरीबन दस दिन बाद निजी अस्पताल को क्वाइटाइंन मुक्त किया गया। इसी घटनाक्रम के बीच जिला कांगड़ा के इंदौरा तहसील के गंगथ के जमाती संक्रमित सामने आने से जिला कांगड़ा में कोरोना मरीजों की संख्या चार तक पहुंच गई। गंगथ के रहने वाले इस कोरोना संक्रमित मरीज को टांडा मेडिकल काॅलेज में 5 मार्च को दाखिल करवाया गया था, जिसे 11 मार्च को इलाज के बाद कोरोना मुक्त कर दिया और उसे अब तकरीबन 14 दिनों तक क्वारंटाइन किया गया है।

इसके बाद कांगड़ा जिले में कोई भी कोरोना संक्रमित मरीज सामने नहीं आया जो कि जिला कांगड़ा के लिए एक बड़ी राहत की खबर थी और उसके बाद कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने पर कांगड़ा जिला अब कोरोना मुक्त हो चुका है। हालांकि जिला कांगड़ा में अब भी कई लिए गए सैंपलों की जांच चल रही है। अब टांडा में जिला ऊना का एक ही संक्रमित मरीज उपचाराधीन रह गया है।

अभी बरतनी होगी एहतियात

उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति का कहना है लोगों के सहयोग से यह संभव हुआ है। लेकिन अभी काफी एहतियात बरतने की जरूरत है।

पहला मामला

मार्च के दूसरे सप्ताह सिंगापुर से लौटे लंज क्षेत्र के युवक को टांडा अस्पताल में लाया गया। 21 मार्च को पुणो से उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अस्पताल में उपचार के बाद 29 मार्च को उसकी सैंपल रिपोर्ट नेगेटिव आई। अंतिम रिपोर्ट भी नेगेटिव आने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

दूसरा मामला

मार्च माह के दूसरे सप्ताह में दुबई से लौटी उपमंडल शाहपुर की एक महिला को 20 मार्च को क्षेत्रीय चिकित्सालय धर्मशाला में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। 21 मार्च को उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। टांडा अस्पताल में उपचार के बाद तीन अप्रैल को महिला स्वस्थ हो गई।

तीसरा मामला

22 मार्च को दिल्ली से मैक्लोडगंज पहुंचे तिब्बती मूल के व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई। बीमारी की हालत में व्यक्ति कांगड़ा के एक निजी अस्पताल पहुंचा था। यहां से टांडा अस्पताल रेफर होने के बाद उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद निजी अस्पताल के डॉक्टरों, स्टाफ व मरीजों को क्वारंटाइन किया गया था। निजी अस्पताल के स्टाफ को पता नहीं था कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है।

चौथा मामला

निजामुद्दीन मरकज में हुए तब्लीगी जमात के आयोजन में भाग लेकर लौटे लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने पर दो अप्रैल को उपमंडल इंदौरा के गंगथ क्षेत्र से एक जमाती को जोनल अस्पताल धर्मशाला लाया गया था। दो दिन तक जमाती के खून के सैंपल फेल हो गए, जबकि तीसरे दिन उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। पांच अप्रैल को व्यक्ति टांडा में भर्ती किया। शनिवार को व्यक्ति की अंतिम रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है और अब उसे छेब में क्वारंटाइन किया गया है।

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