इंग्लैंड में किसी पर कोरोना कफ या थूक फेंकना बना क्राइम, 12 महीने की जेल, गिरफ्तारी शुरू
April 1st, 2020 | Post by :- | 132 Views

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस का ताडंव दुनियाभर में देखा जा सकता है। कोरोना नाम का यह वायरस अब तक दुनियाभर में कई हजार लोगों की जान ले चुका है। लोगों में इस जानलेवा वायरस की दहशत इतनी है कि कई देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति तक उत्पन्न हो गई है। बता दें विशेषज्ञों को अब तक कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं मिल पाया है। ऐसे में सावधानी बरतकर ही इसे काबू में किया जा सकता है।

कोरोना पर काबू पाने के लिए विश्वभर की सरकारें अपनी-अपनी तरफ से कोशिशें कर रही हैं। इसी कोशिश में उन्होंने अपने देश के लोगों के लिए कुछ दिशा-निर्देश का पालन करने के लिए भी कहा हैं। लेकिन हाल ही में लंदन में इस संक्रमण से जुड़ा एक ऐसा निर्देश जारी किया गया है जिसने वहां के अपराधी प्रवृत्ति के लोगों की नींद उड़ा दी है।

दरअसल, लंदन में सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का फैसला किया है जो इस आपातकाल के दौरान लोगों की सेवा में लगे लोगों के सामने कोरोना कफ या थूक फेंकने जैसा कोई काम करते हैं। इंग्लैंड में वायरस से संक्रमित होने का दावा करने वाले या जानबूझकर दूसरे व्यक्ति के सामने खांसी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस, दुकानदार और कमजोर लोगों की शिकायत के बाद ऐसा करना एक अपराध माना गया है।

क्राउन प्रॉसिक्यूश सर्विस के अनुसार आपातकालीन स्थिति में काम करने वाले लोगों के सामने इस तरह का व्यवहार करना (जानबूझकर खांसी) एक अपराध माना जाएगा। जिसके लिए व्यक्ति को एक साल तक की सजा दी जाएगी। जबकि अन्य कार्यकर्ता या जनता के साथ इस तरह का कोई भी कार्य उनपर एक आम हमले की तरह देखा जाएगा।

बता दें, इससे पहले भी कई लोगों पर इस तरह के हमले करने के आरोप साबित होने पर उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है। इतना ही नहीं पुलिस को सरकार द्वारा इस तरह के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करने और नए नियम लागू करने के लिए नई शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। जिसके बाद आधिकारिक सलाह की अनदेखी करने वाले लोगों द्वारा आयोजित कुछ सभाओं और पार्टियों को पुलिस ने बीच में ही रोक दिया था।

मैक्स हिल के निदेशक का कहना है कि कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए जरूरी सेवाएं देने वाले सभी कर्मचारी बेहद आवश्यक हैं। उनका कहना है कि वो इस मामले में बहुत स्पष्ट है कि इस तरह का व्यवहार एक अपराध है जिसे रोकने की सख्त जरूरत है।

बता दें, इससे पहले भी ईस्ट लंदन स्थित, 45 वर्षीय  डैरेन रैफर्टी नाम के एक युवक ने कोरोनोवायरस होने का दावा करने के बाद तीन कर्मचारियों के साथ मारपीट करने और स्कॉटलैंड यार्ड के एक अधिकारी पर खांसने जैसे मामलों को स्वीकार किया है। जिसके बाद उसे इस अपराध के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है।

दूसरा, ब्लैकबर्न स्थित 40 वर्षीय, डेविड मोट, को पुलिस पर थूकने की धमकी देने के बाद जेल में डाल दिया गया है, दरअसल, मोट से पुलिस अधिकारी ने सिर्फ इतना पूछा था कि 23 मार्च को प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की घोषणा के बाद वह दो अन्य व्यक्तियों के साथ क्या कर रहा था।

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