सायबर सुरक्षा: छोटी-सी चूक बन सकती है बड़ी मुसीबत #news4
December 12th, 2022 | Post by :- | 118 Views

पहचान पत्र से जुड़े दस्तावेज हों या फिर किसी लिंक पर क्लिक करना. एक छोटी-सी ग़लती इस हाइटेक दुनिया में आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है, ऐसे में आपकी सुरक्षा आपकी सतर्कता में ही है… सीमा अलावा, एडिशनल एसपी, खंडवा वरिष्ठ पत्रकार सर्जना चतुर्वेदी को सायबर क्राइम के पांच केसेस की मदद से बता रही हैं कि क्यों सायबर सुरक्षा हमारी अपनी ज़िम्मेदारी है.

पांच केसेस, जो बताते हैं कैसे आप भी बन सकते हैं सायबर क्रिमिनल्स के आसान शिकार
सायबर क्राइम से सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने के पहले हम उन पांच मामलों पर बात करना चाहेंगे, जिनमें थोड़ी-सी असावधानी बड़ी मुसीबत का कारण बनी.

केस नंबर एक: सायबर सेल में एक आवेदक उपस्थित हुआ, उसके द्वारा बताया गया कि विगत 3 दिवस में उसके खाते से लगातार छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन के रूप में लगभग 10 हजार रुपए निकल गए हैं. रिपोर्ट पर आवेदक के मोबाइल का अवलोकन कर उसमें दर्ज ईमेल आईडी पर फ्री फायर गेम के वाउचर ख़रीदने संबंधी ईमेल पाए गए. जिस पर फरियादी के फोन पे ट्रांजेक्शन संबंधी जानकारी प्राप्त की गई. उपरोक्त समस्त जानकारी का अवलोकन करके फ़रियादी के स्वयं के पुत्र द्वारा ही फ्री फायर गेम के वर्चुअल वेपन्स, एम्युनेशन और अन्य फीचर्स ख़रीदने के लिए उपरोक्त ट्रांजेक्शन किए जाना ज्ञात हुआ.

केस नंबर दो: सायबर सेल में एक लड़की उपस्थित होती है. उसके द्वारा बताया जाता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसकी इंस्टाग्राम आईडी से उसके फोटोग्राफ़ लेकर उसकी फ़र्जी इंस्टाग्राम आईडी बना दी गई है एवं उसके द्वारा उसकी अन्य दोस्तों को परेशान किया जा रहा है. रिपोर्ट पर फेसबुक से उक्त फर्जी आईडी के लॉग इन की जानकारी प्राप्त करके आवेदिका की सहेली द्वारा ही आईडी बनाकर परेशान किए जाने का पता चला.

केस नंबर तीन: सायबर सेल में एक आवेदक उपस्थित हुआ तथा बताया गया कि वह ऑनलाइन जॉब सर्च कर रहा था. इसी दौरान उसे शाइन डॉट कॉम के नाम से मैसेज प्राप्त हुआ तथा एक वेबसाइट का एड्रेस देकर उस पर लॉग इन प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कहा गया. उस वेबसाइट पर लॉग इन प्रक्रिया पूर्ण करते समय संबंधित द्वारा केवल 10 रुपए का ट्रांजेक्शन किए जाने का कहा गया, जिसका पेज https://naukriintro.in/sbiotp.php प्रदर्शित हो रहा था. फरियादी द्वारा मोबाइल के माध्यम से इन्टरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी उपरोक्त फ़र्जी पेज पर फीड कर दी गई. जिस पर उसके खाते से अनाधिकृत रूप से पैसा निकल गया.

केस नंबर चार: सायबर सेल में एक प्रतिष्ठित व्यापारी द्वारा उपस्थित होकर बताया गया कि उनके द्वारा वर्तमान में चल रही Ola E-bike की फ्रेंचाइज़ी लेने के लिए Online Google पर सर्चिंग की गई. इस दौरान एक वेबसाइट पर जाकर Ola E-bike की फ्रेंचाइज़ी हेतु रजिस्ट्रेशन करवाया गया. जहां से उनके द्वारा फ्रेंचाइज़ी के रजिस्ट्रेशन हेतु समस्त दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से उन्हें प्रेषित किए जाकर लगभग 15 लाख रुपए दो खातों में जमा करवा लिए गए. जिस पर आवेदक द्वारा दिए गए मोबाइल नम्बरों एवं खातों की जानकारी प्राप्त करते समस्त दस्तावेज एवं खाते फ़र्जी नम्बरों से खोला जाना एवं समस्त पैसा निकाल लिया जाना ज्ञात हुआ.

केस नंबर पांच: आधार कार्ड का इस्तेमाल कर फ़र्ज़ी बैंक अकाउंट खोल लिए गए आर लोन भी लिया गया जिसका अकाउंट था उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी. जानकारी तब लगी जब ATM घर पर पहुंचा.

क्यों और किसके साथ होते हैं इस तरह के सायबर अपराध?
अज्ञानता और लालच ही दुःख के दो प्रमुख कारण है. जब हम विशेष रूप से सायबर अपराध की बात करते है तो किसी भी अपराध के पीछे सिर्फ अज्ञानता व लालच ही दृष्टिगोचर होगा. अक्सर सायबर अपराधों में अज्ञानता, ओटीपी (OTP) देने, पासवर्ड शेयर करने, अतिविश्वास व लालच ही इस तरह के अपराधों का मुख्य कारण होते है.
महिलाएं एवं बच्चे इस तरह के अपराधों का ज़्यादा शिकार होते हैं. किसी भी चीज़ की आधी-अधूरी जानकारी होना उसे और अधिक घातक बना देता है. पुलिस के दृष्टिकोण से कुछ प्रकरणों का उल्लेख करना चाहूंगी. जिसमें इंस्टाग्राम पर बच्चियों के आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर तथा फेसबुक पर उनके मित्रों से अनावश्यक पैसे मांगने की घटनाए सामान्य है. ये पूरी तरह से एप्लीकेशन (APP) की जानकारी न होना, व बिना पढ़े अपनी सहमति देकर किसी भी अनजान एप्प को डाउनलोड कर लेना हमें स्वत: ही सायबर अपराधियों तक पहुंचा देता है. फ्री डेटा ने न सिर्फ वास्तविक जगत से बच्चों को दूर कर काल्पनिक दुनिया में गेमिंग, फेसबुक में प्रवेश दिलाया है, जिससे वे बहुत बार न केवल ब्लैकमेल हुए हैं, एवं आपत्तिजनक स्थिति का सामना भी करना पड़ा है. इसी तरह अचानक किसी पुरस्कार, सस्ती डील और लालच से जॉब दिलाने के नाम से धोखाधड़ी की जाती है.

क्या करें सायबर अपराधों से बचने के लिए?
यह बहुत जरूरी है कि हम अधिकृत वेबसाइटों के बारे में सजग रहें तथा किसी भी ट्रांजेक्शन से पहले खातों को वेरिफाई तथा सत्यता के संबंध में पुष्टि की जाना अतिआवश्यक है.
संयम, धैर्य सिर्फ बोलने के लिए ही नहीं होते, इन्हें जीवन में सम्मिलित किया जाकर कई प्रकार की आपदाओं से बचा जा सकता है. जीवन में सक्रियता का अभाव आपको मोबाइल पर अधिक सक्रिय बना देगा. सोशल मीडिया पर बच्चों की गतिविधियों पर निगाह रखें तथा घर में होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं में किसी अन्य व्यक्ति पर आरोप लगाने से पूर्व स्वयं का मूल्यांकन भी कर लेना चाहिए. इन छोटी-छोटी किंतु बेहद महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दें.
-इन्टरनेट बैंकिंग सदैव लैपटॉप या डेस्कटॉप के माध्यम से ही किया जाए, ताकि सम्पूर्ण वेब एड्रेस हमें दिखाई दे.
-अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड भी किसी को देने से पहले वन टाइम यूज़ लिख दिया जाए.
-अधिकृत शॉप से ही प्रिंट आउट लें, किसी पर अति विश्वास न करें.
-ऑनलाइन शॉपिंग से मंगाए सामान के बॉक्स को फेंकने के पहले बाक्स पर लिखे अपने नंबर, एड्रेस आदि जानकारी के लेबल को मिटा दीजिए.
-बच्चों की गतिविधियों पर निगाह रखें.
-ओटीपी शेयर न करें, किसी भी अनचाही लिंक पर क्लिक न करें.

विश्वास ज़रूरी है, पर अतिविश्वास बन सकता है मुसीबत की वजह
एक बात जीवन में उतार लें बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता इसलिए लालच से बचें, संयम को जीवन में आत्मसात करें, उपरोक्त सभी घटनाओं के पीछे लालच ओर अज्ञानता थी, इसी तरह अपने आई कार्ड को भी सोच समझकर दें. कुछ दिनों पहले एक मामले में सीआरपीएफ़ के एक जवान की आईडी का दुरुपयोग करके बाइक बेचने का मामला सामने आया. पीड़ित आईडी देख धोखा खा गया, बहुत अनुसंधान के बाद नंबर से ट्रेस हुआ फ़ोटो सीआरपीएफ जवान की लगाकर नक़ली आईडी बनाई थी. इसी तरह भावनात्मक रूप से भी जुड़कर कुछ गिफ़्ट भेजकर आजकल ठगी की जा रही है, विशेषकर सिंगल महिलाओं के संग. इसमें ये भी है कि बेटा बनकर संबंध बनाए और पैसे ट्रांसफ़र करवा लिए. हद तो इन प्रकरणो में यह है कि पीड़ित काफ़ी समय तक ये विश्वास नहीं कर पाता की ठगी का शिकार हुआ. ये बहुत ही दुःखद पहलू है, इसलिए इस काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलें अपनी तक़लीफ़ों से स्वयं जूझे पर लालच में, सहानुभूति के चक्कर में किसी परेशानी में न फंसे. सावधानी में ही सुरक्षा है.

सीमा अलावा, एडिशनल एसपी, खंडवा और सर्जना चतुर्वेदी की बातचीत पर आधारित.

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