जिंदगी से नहीं मानी हार। बहादुर बेटी ने कर दिया कमाल
January 31st, 2020 | Post by :- | 211 Views

बिजली के करंट से हुई भीषण दुर्घटना में दायां हाथ खो देने के बावजूद मंडी जिले के करसोग की एक बहादुर बेटी अंजना ठाकुर ने जिंदगी से हार नहीं मानी। मुश्किलों से बाएं हाथ से लिखना सीखा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से अब वनस्पति शास्त्र में एमएससी करते हुए पहले प्रयास में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए चयनित हुई है। असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के लिए राज्य परीक्षा ‘सेट’ वह पहले ही पास कर चुकी है। अंजना का सपना है प्रोफेसर बनना। शिक्षा सुरेश भारद्वाज, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैज़ल, कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार और वनस्पति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. देसराज ठाकुर ने अंजना ठाकुर की सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश की इस प्रतिभाशाली बेटी पर गर्व है। वह अपने सपने अवश्य पूरे करेगी।

विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद (ईसी) के सदस्य एवं विकलांगता मामलों के नोडल अधिकारी प्रो.अजय श्रीवास्तव ने बताया कि आईआरडीपी परिवार की इस छात्रा ने दसवीं कक्षा से लेकर बीएससी तक हमेशा 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। आजकल वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विद्योत्तमा गर्ल्स हॉस्टल में रहती है।मंडी ज़िले की उप तहसील पांगणा के गांव गोड़न की रहने वाली अन्जना जब करसोग कॉलेज में बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा थी, उसी दौरान करंट लगने के हादसे से उसका पूरा दायां हाथ काटना पड़ा। इस कारण उसकी पढ़ाई पर भी असर पड़ा और एक वर्ष का नुकसान हुआ। उसने जिंदगी के इस भयावह मोड़ को एक चुनौती माना और बाएं हाथ से लिखना सीखा। परिवार में मां चिंतादेवी, पिता हंसराज और बड़े भाई गंगेश कुमार ने हमेशा हौसला बढ़ाया।
अंजना बताती है कि सीएसआईआर की जेआरएफ परीक्षा को भी उसने एक चुनौती की तरह देखा। रोज़ कई घन्टे की तैयारी की ताकि अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने के लिए यह पड़ाव पार कर सके। अब विश्वविद्यालय और कॉलेज में सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता उसके पास आ गई है और पीएचडी में दाखिला भी आसान हो गया है। उमंग फाउंडेशन और डिसएबल द स्टूडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन (डीएसवाईए) से जुड़ी अन्जना जेआरएफ में अपनी कामयाबी का श्रेय विश्वविद्यालय के अपने शिक्षकों के आशीर्वाद को देती है। उसका कहना है कि दृढ़ संकल्प के साथ की गई कड़ी मेहनत रंग अवश्य लाती है।

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