महिलाओं के कौशल को दिशा दे रहीं डा. दिव्या #news4
February 12th, 2022 | Post by :- | 134 Views

रोहड़ू।  रोहड़ू उपमंडल की चिडग़ांव तहसील के डिस्वाणी पंचायत के जगोठी गांव की डा. दिव्या महिलाओं के कौशल को निखार कर उन्हें दिशा दे रही हैं। वह महिलाओं के उत्थान व उन्हें स्वाबलंबी बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। उनकी इसी मेहनत का नतीजा है कि वह अभी तक 600 से अधिक महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन के लिए प्रेरित कर चुकी हैं। ये महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं, वहीं नेचर ऊर्जा प्लेटफार्म के माध्यम से इनके उत्पादों की मांग भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

डा. दिव्या बायोटेक में पीएचडी हैं। वह पीएचडी के बाद सरकारी नौकरी की तलाश करने के बजाय क्षेत्र की महिलाओं के उत्थान व महिला सशक्तीकरण को लेकर बेहतरीन कार्य कर रही हैं। महिलाओं को सशक्त व स्वावलंबी बनाने के लिए दिव्या ने नेचर ऊर्जा नामक एक प्लेटफार्म बनाया है। इस कार्य में वह उद्यान विभाग, खंड विकास समेत कई विभागों से मदद लेती हैं। उनके इन प्रयास के बाद डा. दिव्या को डा. यशवंत परमार यूनिवर्सिटी आफ हार्टिकल्चर एवं फारेस्ट्री की ओर से बेस्ट प्रोग्रेसिव फार्मर के खिताब से भी सम्मानित किया जा चुका है।

उपमंडल की 600 महिलाओं को जोड़ा

इस काम में डा. दिव्या ने अपने साथ गांव जगोठी व उपमंडल के अन्य गांवों की करीब छह सौ महिलाओं को जोड़कर स्वावलंबन के लिए प्रेरित किया। कोरोना काल के दौरान इन महिलाओं ने गुच्छी, लाल चावल व कुलथ से हर्बल चाय बनाई। जो इस महामारी से लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुई हैं।

कई स्थानों पर शिविर लगाकर देती हैं प्रशिक्षण

डा. दिव्या क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोहड़ू उपमंडल के विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर लगाती हैं। इसमें बी-ग्रेड सेब से चटनी, जूस, एपल विनेगर, सेब का अचार, बुरांश का स्क्वैश, ङ्क्षलगड़े का अचार के साथ स्थानीय अनाज से बनने वाले उत्पादों का प्रशिक्षण दे रही हैं। इसके साथ ही वह महिलाओं को कढ़ाई, बुनाई, करवा व दीपक का भी प्रशिक्षण देती हैं।

डा. दिव्या प्रतिभावान महिला हैं। उन्होंने जो कार्य शुरू किया है वह सराहनीय है। उनके इस प्रयास से गांव की महिलाओं को अपनी प्रतिभा को आगे लाने का मौका मिल रहा है। वहीं वह प्रधानमंत्री के वोकल फार लोकल के आह्वान को भी सार्थक सिद्ध कर रही हैं।

– डा.. कुशाल मेहता, उद्यान विकास अधिकारी रोहड़ू।

मन में इच्छा थी कि ग्रामीण महिलाओं के कौशल को निखार कर बाजार में लाया जाए। महिलाओं में कई हुनर छिपे होते हैं लेकिन वे घर के अंदर तक ही सीमित रहती हैं। पढ़ाई के बाद ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को सेब से बनने खाद्य व पेय पदार्थों तथा क्षेत्र में प्राकृतिक रूप उगने वाले हर्बल वनस्पति व फलों से बनने वाले खाद्य उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू किया है। कई स्थानों पर प्रदर्शनी लगाती हूं। इस काम में कई सरकारी संस्थाएं भी मेरी मदद कर रही हैं।

– डा. दिव्या।

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