पांगी में बर्फबारी व ठंड बढ़ने से निचले क्षेत्रों में उतरने लगे वन्‍यप्राणी #news4
December 24th, 2021 | Post by :- | 122 Views

पांगी : बर्फबारी और ठंड शुरू होते ही ऊंचे स्थानों पर रहने वाले वन्य जीव निचले इलाकों में आने हुए शुरू हो गए हैं। चंबा जिला के पांगी वन मंडल में अनेक प्रजाति के वन्यप्राणी पाए जाते हैं। पांगी के सैचु टावन वन्यप्राणी अभ्यारण्य (वाइल्‍ड लाइफ) स्थल के साथ समस्त पांगी के जंगलों (धारों) में आइवैक्स (तरंगोड़), हिमालयन थार (करथ), पिज, कस्तूरी मृग, काला भालू (ब्लैक बियर), भूरा भालू, लोमड़ी, स्नो लैपर्ड (बर्फानी चीता), बंदर, चिंपांजी समेत अनेक वन्य जीव पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश जीव गांव व बस्तियों के आसपास ही रहते हैं।

कुछ जीव मौसम के साथ साथ अपना रिहायशी स्थान बदलते रहते हैं। कई बार शिकारियों के डर से भी यह जीव अपना स्थान बदलते हैं। पांगी के पुंटो, फिण्डपार मिन्धल, कुलाल, बम्बल के जंगलों में हिमालयन थार पाए जाते है। इस प्रजाति के वन्यप्राणी अन्य जंगलों में नहीं पाए जाते हैं। अन्य प्रजाति के जीव पूरे पांगी के जंगलो में पाए जाते हैं। पांगी में कुछ वर्ष पहले वन्य जीवों की संख्या में अचानक भारी कमी आ गई थी, जिसके बारे में कई तर्क दिए जाते हैं। पिछले दो तीन सालों से इनकी संख्या में बढ़ौतरी होनी शुरू हो गई है। हिमालयन थार और आइवैक्स अप्रैल में गर्मी शुरू होते ही ऊंचाई वाले स्थानों (धारों) की ओर जाना शुरू करते हैं जबकि नवंबर में बर्फबारी होने के साथ समुद्र किनारे के लिए आना शुरू कर देते हैं हालांकि गर्ब्वती मादा और एक नर समुंदर के किनारे के जंगलों में ही रहते हैं।

वन्य प्राणियों के जानकार बताते हैं अन्य वन्य जीव 5000 से 6000 की फीट की ऊंचाई तक ही जाते हैं, जबकि चिंपांजी और बंदर तो बस्तियों के आसपास ही रहते हैं। हाल ही में हिमपात के बाद आइवैक्स और हिमालयन थार धारों से नीचे आने शुरू हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों से शिकार पर प्रतिबंध और लोगों की बदलती सोच के कारण शिकारियों ने शिकार पर जाना छोड़ दिया है जिसके कारण जंगली जानवरों के तादाद में बढ़ोतरी हुई है।

पांगी के जंगलो में अनेक जीव जन्तु पाए जाते हैं जिनके बचाव के लिए वन विभाग हमेशा मुस्तैद रहता है यह वन्य जीव जंतु ऋतु के साथ साथ अपना रहने का स्थान बदलते रहते हैं।

आइवैक्स और हिमालयन थार एक साथ नहीं रहते। जंगली जानवरों का शिकार न करें इसके लिए वन विभाग के वनरक्षक और वनखंड पाल (कर्मचारी) समय-समय पर जंगलों में गश्त करते हैं। लोगों को शिकार न करने के बारे में भी समझाया जाता है।

-सुशील कुमार गुलेरिया, वनमंडल अधिकारी पांगी

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