दीपावली के लिए सज गए बाजार, मिट्टी के दीये की खूब डिमांड, वातावरण भी होता है शुद्ध #news4
October 22nd, 2022 | Post by :- | 99 Views

ऊना : दीपावली से पहले बाजार ग्राहकों से गुलजार हो गए हैं। बाजार में दुकानें रंग-बिरंगी लाइटों से सजी हुई हैं। कारोबारियों को अच्छे व्यापार की उम्मीद है। त्योहार के लिए व्यापारियों ने जो सामान मंगवाया है, उसे दुकानों में डिस्प्ले कर दिया गया है। इलेक्ट्रानिक सामान, वाहनों की बुकिंग भी शुरू हो गई है। सराफा, मोबाइल और कपड़ा मार्केट में लोग अभी से खरीदारी करने लगे हैं। बाजार में करियाना स्टोर पर जाकर लोग मेवों की भी खूब खरीदारी कर रहे हैं। सूखे मेवों में बादाम, काजू, किशमिश, छुआरे, मुनखा, मखाने आदि की खूब बिक्री हो रही है। साथ ही लोग सर्दियों की तैयारी में जुटे हैं। लोग दीपावली पर छूट के चलते इलेक्ट्रानिक्स की दुकानों पर गीजर, पानी गर्म करने की राड व हीटर भी खरीद रहे हैं।

बाजार में आफर्स की भरमार

आनलाइन शापिंग में कंपनियां डिस्काउंट का लालच देती हैं जिससे लोग प्रभावित होते हैं। इसकी प्रतिस्पर्धा बाजार में भी दिखाई दे रही है। इस बार बाजार में भी आफर्स की भरमार है। गिफ्ट आइटम्स की दुकानों में डिस्काउंट के टैग लगाए गए हैं। मिठाई की दुकानों पर अलग-अलग तरह के मिष्ठान सज गए हैं। बंगाल का रसगुल्ला इस बार लोगों को खास पसंद आ रहा है।

दीपक जलाने से वातावरण होता है शुद्ध

कर्मचारी नेहा ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार सरसों और घी डालकर मिट्टी के दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और मच्छरों का नाश होता है। दीपावली पर सभी को मिट्टी के दीपक जलाने चाहिए और अन्य लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए। मैंने इस बार मिट्टी के दीपक खुद खरीदे और औरों को भी उपहार में दिए।

मिट्टी के दीपक से रोशन होता है घर

समाजसेविका रितु ने कहा कि मिट्टी कला को सहेजना हर जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेवारी है। हर बार मिट्टी के दीपक से ही दीपावली पर घर रोशन करती हूं। पांच साल से चीन की बनी कोई वस्तु दीपावली पर नहीं खरीदी है।

मिट्टी के दीपक हमारी संस्कृति

कर्मचारी रेनू ने बताया कि दीपावली पर मिट्टी के दीपक घर में बरकत पैदा करते हैं। आने वाली पीढ़ी इन परंपराओं के साथ चलें, इसके लिए हमें प्रयास करना होगा। मैं अपने परिवार के साथ घर को मिट्टी के दीप से ही रोशन करती हूं।

छोटा दीपक 200 रुपये सैकड़ा

गली मोहल्लों में दीया बेचने पहुंचे कुम्हार दीपा ने बताया कि तीन प्रकार के दीये की बिक्री हो रही है। छोटा 200 रुपये सैकड़ा, दूसरा 50 रुपये दर्जन और तीसरा 10 रुपये पीस है। वह बताते हैं कि उनके पिता घर पर मिट्टी का बर्तन बनाते हैं और इस कला को जीवित रखने वाले अब कम लोग ही बचे हैं।

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