बेटी को सीख. हर माँ का फर्ज है
July 5th, 2019 | Post by :- | 661 Views

विवाह के बाद मायके आने पर जब भी सलवार सूट पहनने की चाहत प्रगट की तो माँ नें साफ़ मना कर दिया कहा “जब ससुराल में पसन्द नहीं करते तो कोई जरूरत नहीं यहाँ भी पहनने की। और हाँ, तुम्हारे पापा को भी पसन्द नही अब तुम्हारा सलवार सूट पहनना। शादी के बाद बेटियाँ साड़ी में ही अच्छी लगती हैं।” मन मार कर साड़ी ही पहनने लगी। कुछ समय बाद भाई की शादी हुई। मैंने देखा भाभी अपने साथ लाये कपड़ों मे सलवार सूट भी लाई थी। अच्छा लगा चलो उसकी माँ ने उसकी इच्छा को मान दिया। हमारी तो मन की मन में ही रह गयी।

कुछ समय बाद फिर जब मेंरा अचानक मायके आना हुआ तो देखा कि माँ भाभी से कह रही थी “रसोई में साड़ी पहन कर सर ढक कर काम करनें की जरूरत नहीं है, जिन कपड़ों में सहूलियत महसूस करो वो ही पहनो।” वो खुद भाभी को एप्रेन दे रही थी। मन को खुशी हुई। फिर मैं अकेले में माँ से बोली “तुम अपनी बहू को तो सूट पहनने देती हो और बेटी को मना करती हो।”

माँ समझाते हुये बोली “वो बहू है हमारी, उसके मन का ख्याल रखना हमारा फ़र्ज़ है। आज हम उसका ख्याल रखेंगे उसे समझेंगे, कल को वो भी हमें समझ कर हमारा ख्याल रखेगी। तुम दूसरे घर की बहू हो, वहाँ के लोगो की भावनाओं का ख्याल रखना तुम्हारा फ़र्ज़ है। अगर हम तुम्हें उन लोगो के ख़िलाफ़ जाने में साथ देंगे तो तुम्हारा घर बिखर जायेगा। पहले अपने गुणों से सबके दिल में जगह बनाओ फिर उनकी सहमति से अपने दिल की ख़्वाहिश पूरी करो। हम तो बहू के साथ बस वही कर रहे है जो व्यवहार हम तुम्हारे लिये तुम्हारी ससुराल में चाहतें हैं। देखना एक दिन सब बदल जायेगा।

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