FacebooktwitterwpEmailaffiliates 1971 भारत-पाक युद्ध : खुशाल ठाकुर बोले, भारत ने पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को छोड़ा, हमारे सैनिक आज भी उनकी जेलों में बंद #news4
December 16th, 2021 | Post by :- | 108 Views

मंडी : 1971 Indo-Pak War, ‘1971 की लड़ाई में हमारे वीर जवानों ने कम संसाधनों के बावजूद पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को बंधी बनाया। भारत ने उन्हें तो छोड़ दिया, लेकिन हमारे सैनिक आज भी उनकी जेलों में हैं।Ó

पूर्व सैनिकों का यह दर्द वीरवार को विजय दिवस की 50वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में झलका। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।

शहर के इंदिरा मार्केट में स्थित शहीद स्मारक परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूर्व सैनिक लीग के मुख्य सलाहकार सेवानिवृत्त कर्नल केके मल्होत्रा ने कहा कि 1971 के बंधी बनाए गए सैनिकों की देखरेख में उनकी ड्यूटी बरेली में थी। दो साल तक उनके सैनिकों और अफसरों को मान-सम्मान दिया गया और बाद में सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया और वे खाली हाथ रह गए।

कर्नल टीपीएस राणा ने कहा कि नेता कहते हैं कि सैनिक मरने के लिए होते हैं। ऐसे बयान देकर सैनिकों का हौसला नहीं तोडऩा चाहिए। एक सैनिक सेना में जाता है शहादत को दिल में रखकर।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि 1971 के युद्ध 14 दिन में ही पाकिस्तान ने हथियार डाल दिए थे। हमारे 3845 वीर योद्धाओं ने प्राणों की आहुति दी थी। इसमें प्रदेश के 190 सैनिक जिनमें 21 मंडी के बलिदानी थे। उन्होंने युवाओं से आगे आकर सेना में भर्ती होने का आह्वान किया। इस मौके पर डिफेंस वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की सदस्यों ने देशभक्ति गीत गाया। कार्यक्रम में जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, लीग के महासचिव कैप्टन हेतराम, कर्नल भीम ङ्क्षसह, कर्नल हरीश वैद्य, कर्नल रङ्क्षवद्र ङ्क्षसह, कर्नल वीरेंद्र तपवाल मौजूद रहे।

तीन वीर नारियों को किया सम्मानित

इस मौके पर 1971 के युद्ध में भाग लेने व बलिदान देने वाले तीन बलिदानियों की वीर नारियों ङ्क्षचता कुमारी, कृष्णा देवी और योगिता देवी को सम्मानित किया।

देहदान करेंगे कर्नल टीपीएस राणा

विजय दिवस पर भाग लेने आए सेवानिवृत्त कर्नल टीपीएस राणा ने देहदान का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने रिवालसर में हुई बैठक में लिया था। कर्नल राणा 41 साल तक सेना में रहे हैं और वह मंडी जिला के गोखडा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि देहदान की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्होंने नेरचौक मेडिकल कालेज से संपर्क किया है।

बहन की बेटी के सहारे काटी जिंदगी

समारोह में सम्मानित की गई बलिदानी किशन चंद की पत्नी ङ्क्षचता कुमारी ने कहा कि जब उनके पति 1971 की लड़ाई में गए तो शादी को डेढ़ साल हुआ था। उनकी कोई संतान नहीं थी, फिर उनकी शहादत की सूचना ही आई। उसके बाद अकेली जिंदगी काटी और बहन की बेटी का पालन-पोषण किया।

बांग्लादेशियों को दिया था सहारा

कैप्टन प्रेम सिंह की पत्नी योगिता देवी ने कहा कि 1971 की लड़ाई के दौरान पश्चिमी पाकिस्तान जो आज बांग्लादेश हैं, के नागरिकों की मदद वह करते थे। वह अक्सर अपने युद्ध की बातें उन्हें बताते थे।

उनकी बदौलत ही सम्मान

बलिदानी नरोत्तम राम की पत्नी कृष्णा देवी कहती हैं कि उनकी बदौलत उन्हें सम्मान मिलता है। वह बेशक उनके साथ नहीं हैं, लेकिन जब भी कहीं उनका नाम आता तो गर्व महसूस होता है।

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