हिमाचल / इवैल्युएशन की देरी से फर्स्ट ईयर रिजल्ट हाेगा लेट
May 31st, 2019 | Post by :- | 481 Views

हिमाचल यूनिवर्सिटी की ओर से हाॅल ही में करवाई गई यूजी फर्स्ट ईयर की परीक्षा का रिजल्ट इस बार देरी से अाएगा। छात्राें के इवैल्युएशन में देरी हाे रही है। करीब 40 हजार छात्राें ने इस बार परीक्षा दी है। इसके अलावा सेमेस्टर सिस्टम के तहत भी छात्राें ने परीक्षा दी है। छठे सेमेस्टर के छात्राें का परिणाम भी समय पर निकालना विवि प्रशासन के लिए चुनाैती है।

एचपीयू में स्टाफ की है भारी कमी

  1. अभी तक अांसरशीटाें का मूल्यांकन कार्य तक शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि, विवि ने समय से प्रदेश भर में अांसरशीटें के मूल्यांकन के लिए केंद्र स्थापित कर कुछ में अांसरशीटें भी पहुंचा दी है, मगर अभी भी कई केंद्रों में अांसरशीटें पहुंचना बाकी है। इनकी अवाॅर्ड लिस्टें कॉलेजों से सीधे एचपीयू पहुंचती हैं। यहां पर मौजूद कर्मचारी डाटा एंट्री से लेकर परिणाम निकालने का काम करते हैं।

  2. उन पर दबाव रहता है कि 25 दिन के भीतर रिजल्ट भी निकालना हैं। जबकि अभी इवेल्युएशन हाेने में ही देरी हाे रही है। एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. जेएस नेगी का कहना है कि यूजी की परीक्षाएं समाप्त हाे चुकी है। लगभग 20 छात्र के परिणाम को निकालने के लिए एक रेगुलर गैर शिक्षक है। एचपीयू में डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को आउटसोर्स के अाधार पर रखा जाता हैं।

  3. वे सिर्फ डाटा को ही कंप्यूटर पर चढ़ाते हैं। सीक्रेसी लीक न हो, इसलिए रेगुलर कर्मचारियों की ही ड्यूटी लगाई जाती हैं। परीक्षा शाखा में रेगुलर कर्मचारी काफी कम हैं। परीक्षा परिणाम आने में देरी होती हैं। एक कर्मचारी पर 20 से अधिक स्टूडेंट के रिजल्ट बनाने की जिम्मेदारी होती है।

  4. प्रदेश यूनिवर्सिटी में गैर शिक्षकों की कमी का नुकसान अंडर ग्रेजुएट परीक्षाओं के छात्रों को उठाना पड़ता है। क्योंकि एचपीयू के पास यूजी की परीक्षाएं करवाने, परिणाम निकालने और छात्रों की अवाॅर्ड लिस्ट की रजिस्‍टर एंट्री करने के लिए स्टाफ ही नहीं है। परीक्षाएं करवाने में देरी से जिसके चलते परिणाम आने मेंं भी देरी होगी।

  5. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान से परेशान छात्रों की सुविधा को देखते हुए राज्य सरकार ने रूसा को वार्षिक रूप में लागू किया था। इसके तहत छात्रों को साल में सिर्फ एक बार ही परीक्षा देनी थी। ऐसे में छात्रों की राहत को देखते हुए यह फैसला अब छात्रों पर ही भारी पड़ गया है। वहीं, दूसरी ओर शिक्षाविदों का दावा है कि वार्षिक प्रणाली के तहत इस बार छात्रों के रिजल्ट में काफी गिरावट आएगी। बताया जा रहा है कि इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी फर्क पड़ेगा अाैर अाठ पेपर का एक साथ मूल्यांकन करना अासान नहीं है।

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