ढाई दशक से प्रदेश भाजपा के दो बड़े चेहरे रमेश धवाला व रवि बदल सकते हैं चुनाव क्षेत्र, जानिए समीकरण #news4
January 30th, 2022 | Post by :- | 140 Views

काँगड़ा : ढाई दशक से प्रदेश भाजपा के दो बड़े चेहरे रमेश धवाला व रविंद्र रवि अपने चुनाव क्षेत्र बदल सकते हैैं। दोनों नेता भाजपा हाईकमान के आदेश की दुहाई देकर ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन बयान उनकी इच्छा को जगजाहिर कर रहे हैं। प्रदेश में पुनर्सीमांकन के बाद थुरल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की हसरत खो चुके रविंद्र रवि ने 2007 में देहरा से राजनीति की दूसरी पारी शुरू की थी। हालांकि वह उस समय देहरा के बजाय ज्वालामुखी से चुनाव मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन धवाला की न के बाद ऐसा नहीं हुआ था।

पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के विश्वासपात्र होने के कारण रवि को ज्वालामुखी से उम्मीदवार के तौर पर उतारने के प्रयास हुए थे, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने धवाला की पैरवी करते हुए उनकी ज्वालामुखी से टिकट नहीं कटने दी थी। रवि ने इसलिए ज्वालामुखी से टिकट का दांव खेला था, क्योंकि उनकी परंपरागत सीट थुरल की 19 पंचायतें ज्वालामुखी हलके में मर्ज कर दी गई थीं, जबकि धवाला ने 1998 में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद 2003 में भाजपा की टिकट पर विजयी परचम लहराया था।

2007 में ज्वालामुखी से दोनों का दावा इतना मजबूत था कि प्रदेश भर के उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद अंत में ज्वालामुखी व देहरा के प्रत्याशियों की घोषणा हुई थी। अब बदलते राजनीतिक परिदृश्य में धवाला व रवि के तेवरों में बदलाव आया है। रवि देहरा से चुनाव लडऩे की बात करते रहे हैं। अब हाईकमान के आदेश की बात कहकर कहीं से भी चुनाव मैदान में उतरने की वचनबद्धता दोहरा रहे हैं।

शनिवार को विधायक रमेश धवाला ने ऐलान किया कि पार्टी देहरा से चुनाव लडऩे का आदेश देगी तो उन्हें वहां जाने से कोई गुरेज नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि ज्वालामुखी उनकी कर्म भूमि है, जहां से उन्होंने पंचायत से लेकर विधायक व मंत्री रहते जनता की सेवा की है। वह देहरा विधानसभा क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं और यह उनकी जन्मभूमि भी है।

धवाला के बयान पर पूर्व मंत्री रविंद्र रवि ने कहा ज्वालामुखी या देहरा जहां से भी पार्टी कहेगी, चुनाव लड़ूंगा। 2022 में दोबारा भाजपा की सरकार बनानी है। ऐसे में पार्टी जहां से कहेगी, हम तैयार हैं। धवाला का देहरा जाने बारे मामले में 2007 की तुलना में इस बार के रवैये में आया बदलाव कहीं न कहीं यह दर्शा रहा है कि अंदरखाते वह इस बार देहरा से चुनाव लडऩे का मन बना चुके हैं।

रवि भी कहीं न कहीं ज्वालामुखी से चुनाव मैदान में उतरने के लिए आश्वस्त दिख रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने छह माह से लगातार ज्वालामुखी में जनसंपर्क अभियान पर जोर दिया है। रवि ने 1993 से 2012 तक लगातार पांच चुनाव जीते हैं, जबकि 2017 में उन्हें देहरा से हार का मुंह देखना पड़ा था। धवाला ने 1998 से 2017 तक पांच चुनाव लड़कर चार बार जीत दर्ज की थी, जबकि 2012 में चुनाव हार गए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों नेताओं के बदले सुर साफ कह रहे हैं कि इस बार वे अपनी परंपरागत सीट छोडऩे को राजी हो गए हैं।

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