GDP….? आजकल या शब्द हर किसी के जहन में है |
January 9th, 2020 | Post by :- | 206 Views

GDP….?
आजकल या शब्द हर किसी के जहन में है | क्यूंकि भारत की जीडीपी गिर रही है और सबको देश की चिंता है | वास्तब में आजकल हर कोई अर्थशास्त्री बना हुआ है और सरकार को अपने अपने तरीके से काम करवाने का इच्छुक है | लेकिन इसका क्या कारन है और इसके पीछे क्या वजह है कि यह गिर रही है | तो ये हम आपको पूरा समझने का प्रयास करते हैं |

हम यहां एक उदाहरण देना चाहते हैं | मान लो आपके पास एक बहुत पुराना सेब का बगीचा है , उसके पेड़ बहुत पुराने हैं कई कई जगह टहनियां सूख रही हैं | इस बगीचे में पुरानी टहनियां हैं जिनमें कोम्पल काम ही आते हैं ,ऐसे में हर वर्ष सेब लग्न कम से कम होता जाता है ,कई बार कोई पेड़ पूरा ही सूख जाता है | ऐसे में इस बगीचे में सेब तो निरंतर लग रहे हैं मगर बेहद कम | ऐसे में आपके पास दो तरीके हैं या तो आप हर वर्ष कुछ पेड़ काटकर नए पेड़ लगाएं , या पूरे पेड़ काटकर नया बगीचा लगाएं | अगर आप हर साल कुछ पेड़ काटकर नए लगाते हैं तो बगीचे को नया करने में कई वर्ष लग जायेंगे , हाँ इस बीच आपकी इन्कम चलती रहेगी क्यूंकि कुछ सेब लगते रहेंगे | लेकिन अगर आप सारा बगीचा एक साथ बदल देते हैं तो कुछ वर्ष आपको बिन इन्कम के रहना पड़ेगा , लेकिन उसके बाद आपके बगीचे में हर वर्ष फसल बढ़ती ही जाएगी |
बस कुछ ऐसा ही देश में हुआ है …. पुराना सिस्टम था उसे बगीचे की तरह बदल दिया गया है | देश में टेक्स एकत्रित करने का बहुत ही पुराना सिस्टम था | यह सिस्टम बिलकुल भी पारदर्शी नहीं रहा था , हालाँकि जब यह चलाया होगा तब बेसक देश के पास इससे बेहतर बिकल्प नहीं रहे होंगे , मगर आज हैं | पुराने सिस्टम को ब्यापारी भांप चुके थे और बिना टेक्स दिए ही काम चला रहे थे | बहुत सा सामान बहरी देशों से आ जाता था और बिना टेक्स दिए ही बिक जाया करता था |ऐसे में देश पर उसका बोझ तो पड़ता था मगर टेक्स नहीं आता था , ऐसे में यह लगातार देश के लिए हानिकारक था | इस सिस्टम में देश चल तो रहा था मगर आगे नहीं बढ़ रहा था | कोई भी सरकार इसे बदलने का जोखिम नहीं लेना चाहती थी क्यूंकि इसको बदलने का मतलब था अगले कुछ वर्षों के लिए देश की इन्कम को कम कर देना , हालाँकि उसके बाद यह इन्कम कई गुना बढ़ने बाली थी | मगर इस सिस्टम को बंद करने से लाखो अवैध कमनीयां बंद हो जाती जिससे करोड़ों लोग बेरोजगार होते | सरकारें अगले चुनावों तक का ही सिस्टम बनाती हैं ऐसे में कोई इसे छेड़ना नहीं चाहती थीं |
मौजूदा मोदी सरकार ने इस सिस्टम को न सिर्फ छेड़ा बल्कि बदल ही डाला | सिस्टम बदलने से लाखों अवैध कंपनियां बंद हो गई | अब इन कंपनियों को वैध तरीके से दोबारा चलने के लिए कुछ वर्ष तो लग ही जायेंगे | यान 4-5 वर्षों बाद इस नए सिस्टम से इतना फायदा होने बाला है कि पुराने सभी घाटे पूरे हो जायेंगे | पुराने सिस्टम के चलते देश में चीन का लगभग 40 फीसदी सामान बिक रहा था , वह भी बिना किसी टेक्स दिए हुए | कई देशों ने भारत को एक मार्किट मान कर अपने देश का कचरा तक यहां बेचना शुरू कर दिया था | मगर नए सिस्टम में जब हर वास्तु टेक्स के दायरे में लाइ जा रही है तो इन विदेशी कंनियों को बापिस जाना पड़ा | अब जो थोक ब्यापारी इन कंपनियों से सामान लेते थे उन्हें देश में ही नै कंपनियां तलाश करनी पड़ रही हैं, या विदेशों से बिल पर सामान मंगवाना पड़ रहा है , यही वजह है कि कुछ उथल पुथल हो रही है | जर्मनी के कुछ अर्थ शास्त्रियों ने भारत के नए टेक्स सिस्टम बारे कहा था कि भारत अगर अगले अढ़ाई से तीन वर्षों तक इस सिस्टम को झेल लेगा , तो उसे विश्वशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता |

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