सरकार का OPS बहाली की तरफ एक और कदम, SOP बनने के बाद जारी होगी अधिसूचना
January 17th, 2023 | Post by :- | 31 Views

शिमला : हिमाचल प्रदेश में 20 साल बाद पुरानी पैंशन को बहाल करने के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की जाएगी। वित्त विभाग की तरफ से एसओपी को तैयार करने के बाद पुरानी पैंशन बहाली से संबंधित अधिसूचना को जारी कर दिया जाएगा। इस अधिसूचना के जारी होने के बाद प्रदेश के 1.36 लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। एसओपी बनाने के लिए ऑफिस मैमोरंडम जारी कर दिया गया है। यानि वित्त विभाग की तरफ से जारी की जाने वाली एसओपी में पुरानी पैंशन को प्रदेश में फिर से लागू करने का फार्मूला सामने आएगा। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस तरह से कर्मचारियों को पुरानी पैंशन योजना के दायरे में लाया जाएगा।

ओपीएस को बहाल करने वाला 5वां राज्य होगा हिमाचल
बता दें कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में गत 13 जनवरी को लोहड़ी पर्व के दिन हुई मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पुरानी पैंशन योजना को बहाल करने का निर्णय लिया गया था। हिमाचल प्रदेश इस योजना को बहाल करने वाला देश का पांचवां राज्य होगा। इससे पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब में इसको बहाल किया जा चुका है। हालांकि पुरानी पैंशन को लागू करते समय कर्मचारियों के पास नई पैंशन योजना (एनपीएस) को चुनने का विकल्प भी होगा, ऐसे में यह कर्मचारी के ऊपर निर्भर करेगा कि वह पुरानी पैंशन योजना का लाभ लेना चाहता है या फिर नई पैंशन योजना को स्वीकार करता है।

सरकार ने छत्तीसगढ़ का फार्मूला अपनाया 
राज्य सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पैंशन देने के लिए छत्तीसगढ़ के फार्मूले को अपनाया है। सरकार ने इसके लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर वैट बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का दावा है कि इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश में उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर से सस्ता डीजल उपलब्ध होगा। राज्य मेें इस योजना को लागू करने से इस साल सरकारी कोष पर 800 से 900 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पडऩे की संभावना है।

केंद्र से 8000 करोड़ लेने के लिए करना होगा संघर्ष 
हिमाचल प्रदेश में एनपीएस की श्रेणी के कर्मचारियों के केंद्र सरकार के पास 8000 करोड़ रुपए हैं। इसमें 14 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार और शेष 10 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों का है। हालांकि इसको लेकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पत्र व्यवहार भी किया गया है, लेकिन इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला रहा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अपने दम पर इसको बहाल करने का निर्णय लिया है।

10 साल की नियमित सेवा के बाद ही मिलेगा लाभ 
प्रदेश में कर्मचारियों को पैंशन का लाभ लेने के लिए न्यूनतम सेवाकाल 10 साल होना अनिवार्य रखे जाने की संभावना है। इसके तहत वर्ष 2003 से पहले के सैंट्रल सिविल पैंशन रूल 1972 को अपनाया जा सकता है। अब सरकार की तरफ से नए सिरे से तैयार की जाने वाली एसओपी में जिन नियम एवं शर्तों को अपनाया जाता है, उसके आधार पर ही पैंशन मिलेगी। इसमें एक नियम यह भी हो सकता है कि कर्मचारी को मिले अंतिम वेतन की 50 फीसदी राशि पैंशन के रुप में प्रदान की जा सकती है। इसी तरह पारिवारिक पैंशन को लेकर भी कोई फार्मूला सामने आएगा। कर्मचारियों का जीपीएफ काटने का सिलसिला भी जल्द शुरू होगा।

ओपीएस के लिए कर्मचारियों ने लड़ी लंबी लड़ाई
राज्य में कर्मचारियों ने ओपीएस की बहाली के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। कर्मचारियों की यह लड़ाई वर्ष 2015 में शुरू हुई, जिसको लेकर क्रमिक अनशन, जिला व प्रदेश स्तर पर रैलियां आयोजित की गई। पूर्व भाजपा सरकार के समय इस आंदोलन ने और तेजी पकड़ी, जिससे कई बार कर्मचारियों और सरकार के बीच से सीधा टकराव भी देखने को मिला। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने नाराज कर्मचारियों को अपनी तरफ करने के लिए मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ओपीएस बहाली का आश्वासन दिया, जिसे बाद में पूरा किया। अब इसको लेकर एसओपी यानि नियम एवं शर्तों से संबंधित अधिसूचना का जारी होना शेष है।

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