यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि “लोकतंत्र मूर्खो का शासन है”.
December 7th, 2019 | Post by :- | 154 Views

आज हैदराबाद की घटना ने साबित कर दिया, कि अरस्तू ने बिल्कुल सही कहा था । हैदराबाद की दुष्कर्म और उसके बाद पीड़िता को जलाने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी थी, मगर पुलिस का गोलीकांड भी कम दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है।
पीड़िता को जलाने की घटना की तस्वीरें पूरे देश नें देखी, हर किसी के भीतर से बदला लेने का एक स्वर निकलता गया। मोमबत्ती गैंग नें भी फिर से अपना काम शुरू किया, और मीडिया इस सब को लगातार दिखाने लगी.. इस घटना के विरुद्ध प्रतिक्रया होना संभावित था, सब चाहते थे कि आरोपियों को भी हिंसक तरीके से मौत के घाट उतार दिया जाए.. मगर न्याय शायद ही कोई चाहता था..
.किसी को नहीं पता था कि, आरोपी, सच में गुनहगार थे भी या नहीं, यह अदालत में साबित होता, उससे पहले ही पुलिस नें सबको मार कर शायद अपनी गलती पर पर्दा डाल दिया।
हो सकता है असली गुनाहगार, आज भी खुले घूम रहे हों….
3-4 वर्ष पूर्व, ऐसी ही एक घटना शिमला में हुई थी। लड़की के अपहरण की रपट क्या दर्ज हुई, मोमबत्ती गैंग नें रिज पर अपना जलवा बरकरार कर दिया.. दबाव में पुलिस नें कॉलेज के 5 युवक पकड़ लिए। मोमबत्ती गैंग चिल्लाने लगी कि बिना कोई मुकदमा चलाए, इन सब को फांसी दे दो..
अगर तब हिमाचल पुलिस भी इनका एनकाउंटर कर देती, तो मोमबत्ती गैंग, जोर से ताली पीटती.. मगर जांच में पता चला कि बह लड़की, अपने किसी प्रेमी संग भागी हुई है। ऐसे में पकड़े गए पांचो आरोपी, बेकसूर थे.. मगर फिर किसी नें इन पांचों बच्चों के लिए एक भी मोमबत्ती नहीं जलाई, कि इन्हें गलत तरीके से जेल में क्यों रहना पड़ा.. क्यों लड़की और उसके परिजनों नें झूठा मामला बनवाया.. जैसे ये लोग किसी के गर्भ में नहीं पले हों, बल्कि सीधे आसमान से ही टपके हों.. 3 महीने तक इन बच्चों को झूठे केस में, जेल की प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

हैदराबाद मामले का सच भी कुछ इसी तरह का हो सकता था। वास्तव में हम लोगों की सोच ही हिंसक हो गई है।

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