गुरु गोबिंद सिंह ने विवाह के लिए हिमाचल में बसा दिया था गुरु का लाहौर, आज के दिन हर साल निकलती है बरात #news4
February 5th, 2022 | Post by :- | 136 Views

बिलासपुर : हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर में गुरु का लाहौर है। बसंत पंचमी पर दो दिवसीय गुरु गोविंद सिंह जी के विवाह उत्सव को धूमधाम से मनाया जा रहा है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पंजाब हिमाचल हरियाणा से गुरु महाराज के विवाह उत्सव में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं। शुक्रवार शाम के समय गुरु गोविंद सिंह जी की बरात पांच प्यारों की अगुवाई में शोभा यात्रा के रूप में ढोल नगाड़ों के साथ गुरुद्वारा सेहरा साहिब से निकली। हजारों की संख्या में संगतों ने जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा में भाग लिया। हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष रणधीर शर्मा भी शोभायात्रा में शामिल हुए। गुरु का

लाहौर पहुंचने पर बरात का स्वागत बड़े धूमधाम से किया गया, मिठाइयां बांटी गई, फल बांटे गए।

ऐसे पूरी की जाती हैं शादी की रस्में :

हिमाचल प्रदेश पुलिस और प्रशासन द्वारा इस मेला के दौरान पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। गुरु का लाहौर में स्थान है, जहां पर गुरु महाराज के लाबा फेरे हुए थे और सेहरा साहिब वह स्थान है, जहां पर गुरु महाराज की सेहरा बंधी हुई थी। शादी के पहले दिन श्रीअखंड साहब पाठ शुरू किया गया, चार फरवरी को मध की अरदास की गई और अब पांच को गुरु ग्रंथ साहिब व पालकी को सेहरा बांधकर यहां पहुंचाया गया। पालकी गुरु का लाहौर पहुंचने से पहले सेहरा साहब में रुकी और यहां उनकी सेहराबंदी हुई। उसके बाद जैसे ही गुरु का लाहौर में यह बरात पहुंची तो यहां मिलनी का कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें एक तरफ आनंदपुर साहिब की संगत व दूसरी तरफ गुरु का लाहौर की संगत रहती है। यहां हार लेकर शबद कीर्तन करते हुए उनका अभिनंदन किया गया और पूरे विधान के साथ इस पर्व को संपन्न किया जा रहा है। इस दौरान यहां सात तरह की मिठाइयां, चार लाबां का पाठ होगा, अरदास होगी, भोग होगा, संगतों को ट्रक भरकर मिठाइयां बांटी जाएंगी।

कहां है गुरु का लाहौर

पंजाब राज्य के आनंदपुर साहिब से 12 किलोमीटर दूर स्थित हिमाचल के बस्सी गांव में गुरु का लाहौर बनाया गया था। इसी स्थान से गुरु गोविंद सिंह जी ने अपनी शादी रचाई और उसके बाद अब हर वर्ष यहां उनकी शादी का पर्व सिख समुदाय द्वारा मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन यह रस्म निभाई जाती है। आनंदपुर साहिब से गुरु का लाहौर के लिए गुरु गोविंद सिंह की बरात में हजारों की संख्या में सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।

रोचक है इतिहास

सिखों के दसवें गुरु श्री गोबिंद सिंह जी का विवाह लाहौर (पाकिस्तान) वासी हरिजस सुभिखीए खत्री की पुत्री माता जीतो जी के साथ 23 हाड़ संवत 1734 में कस्बा गुरु का लाहौर में हुआ था। यह स्थान आनंदपुर साहिब से कुछ दूरी पर हिमाचल प्रदेश में है। लाहौर वासी हरिजस की यह इच्छा थी कि गुरु गोबिंद सिंह अपनी बरात लेकर लाहौर पहुंचे पर श्री आनंदपुर साहिब में गुरु जी ने कुछ जरूरी काम शुरू किए थे। इसलिए उन्होंने लाहौर जाना ठीक नहीं समझा था और यहीं निकट ही विवाह की खातिर लाहौर बना दिया गया था। यहीं उनका विवाह माता जीतो जी के साथ हुआ था। यही कारण है कि हर साल बसंत पंचमी के दिन गुरु का लाहौर में गुरु साहिब के विवाह पर्व के संबंध में जोड़ मेला लगता है।

इस वर्ष भी भव्‍य आयोजन

श्रीहर गाेविंद सहित रणजीत सिंह अखाड़ा आनंदपुर साहिब के गतका मास्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि इस वर्ष भी श्री आनंदपुर साहिब से 12 किलोमीटर की दूरी पर हिमाचल में कस्बा गुरु का लाहौर में श्री गुरु गाेबिंद सिंह जी का विवाह पर्व मनाया जा रहा है। पंजाब के होशियारपुर से यहां कई प्रकार की मिठाइयां लाई गई हैं।

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