हिमाचल के सीएम सुक्खू बोले- “पहली बैठक में कर्मचारियों को मिलेगी बकाया पेंशन”
January 12th, 2023 | Post by :- | 79 Views

शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को नया लाभ देने का वादा किया है। दरअसल, सरकार अपने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ प्रदान करेगी। सरकार ने ऐसा करने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि इससे उन्हें केवल मौद्रिक लाभ प्रदान नहीं किया जाता है बल्कि इससे उन लोगों में एक भावना पैदा होगी।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को राज्य सचिवालय के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि कर्मचारियों को उनका बकाया पेंशन समय पर मिल जाए। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा वित्तीय कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची के कारण राज्य 75,000 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दब गया था। अब सरकार पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सभी संस्थानों को क्रियाशील बनाने के लिए सहयोग की जरूरत

सुक्खू का कहना है कि सरकारी खजाने के लिए राजस्व अर्जित करने के लिए सरकार को डीजल पर 3.01 रुपये प्रति लीटर का वैट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सुक्खू ने हिमाचल में रही बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार ने केवल चुनावों पर नजर रखने और लोगों को लुभाने के लिए अपने कार्यकाल के अंत में लगभग 900 संस्थान खोले थे। उन्होंने कहा, “ये सभी संस्थान और कार्यालय बिना किसी बजटीय प्रावधान के खोले गए हैं। अगर इन सभी संस्थानों को क्रियाशील बनाया जाना है, तो राज्य को उनके सुचारू संचालन के लिए 5,000 करोड़ रुपये की और आवश्यकता होगी।”

ग्रामीण इलाकों का विकास प्रथम कार्य

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि अगले पांच सालों तक सरकार केवल ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास करेगी क्योंकि राज्य की 90 प्रतिशत आबादी अब भी गांव में रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए सरकार प्रतिदिन 10 लीटर गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर की दर से और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदेगी। साथ ही उन्होंने किसानों से कहा कि वे बड़े पैमाने पर जैविक खेती करें।

अनाथ बच्चों के लिए बनाया मुख्यमंत्री सुखाश्रय कोष

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने तूतीकंडी के अनाथालय का दौरा किया था ताकि वो खूद इस बात का जायजा ले सकें कि वहां रहने वाले किसी स्थिति में हैं और इन्हें कैसी सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “वहां जाने के बाद मैनें अधिकारियों से कहा कि इनकी स्थिति को और भी बेहतर बनाने का प्रयास किया जाए इसके लिए हमने 101 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री सुखाश्रय कोष बनाने का भी फैसला किया।” सुक्खू ने बताया कि इसके लिए उन्होंने अपने एक महीने की सैलरी दान कर दी है और साथ ही सभी विधायकों से अपील की है कि वे भी इसके लिए दान करें। इस दान कोष के जरिए अनाथ बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे और अगर चाहेंगे तो आगे भी किसी न किसी प्रोफेशनल कोर्स में अप्लाई कर पाएंगे।

 

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