हिमाचल: 40 फीसदी तक बढ़ गए प्लास्टिक के दाम, दवाइयां और कॉस्मेटिक सामान होगा महंगा #news4
April 17th, 2022 | Post by :- | 93 Views
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पीवीसी, गत्ते व स्टील के बाद अब प्लास्टिक की कीमतों में भी वृद्धि हो गई है। युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मालभाड़ा बढ़ने से प्रदेश के सबसे बड़े फार्मा हब बीबीएन के उद्योगों में कच्चा माल महंगा पहुंच रहा है। फार्मा हब में प्लास्टिक की ट्यूब, बोतल, ढक्कन और लेमी ट्यूब का इस्तेमाल होता है, लेकिन प्लास्टिक के दाम बढ़ने से यह महंगा आने लगा है। इसका असर दवाइयों और कॉस्मेटिक सामान की कीमतों पर भी पड़ेगा।

प्लास्टिक की ट्यूब व लेमी ट्यूब में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। प्लास्टिक का दाना 125 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 155 रुपये हो गया है। डेढ़ रुपये वाली ट्यूब अब दो रुपये में मिल रही है। इसके अलावा ढक्कन, बोतल आदि भी 35 से 40 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। इससे अब दवाओं की पैकेजिंग भी महंगी हो गई है, क्योंकि कॉस्मेटिक और एंटीबायोटिक स्किन पर लगने वाली सभी दवाएं और क्रीम इन प्लास्टिक की डिब्बियों में पैक होती है। लिक्विड दवाएं और सिरप भी प्लास्टिक की बोतल में ही भरे जाते हैं। ऐसे में इनके महंगे होने से अब दवाओं पर असर होना तय है। बीबीएन में करीब 350 दवा कंपनियां हैं, जिन पर इसका सीधा असर हो रहा है।

एफआईआई के प्रदेशाध्यक्ष चिंरजीव ठाकुर ने बताया कि कच्चे माल पर रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काफी असर पड़ा है। डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार बढ़ोतरी से कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं। पांच से दस रुपये प्रति लीटर डीजल का दाम कुछ ही दिनों में बढ़ने से भाड़ा बढ़ गया है। प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित सिंगला ने बताया कि प्लास्टिक दाने के रेट बढ़ने से दवा कंपनी में लगने वाले ढक्कन, बोतल व लेमी ट्यूब आदि मंहगे हो गए हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। संवाद

पहले इनके बढ़े थे दाम
फार्मा उद्योगों में लगने वाले एल्यूमीनियम फॉयल के दाम बढ़े पहले एल्यूमीनियम का दाम 232 रुपये प्रति किलो था जो युद्ध के बाद 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। पीवीसी 120 से बढ़ कर 190 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। मोना कार्टन 85 से 95 रुपये प्रति किलो हो गया। स्टील के दाम 55 से 62 रुपये प्रति किलो हो गए।

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