हिमाचल को दालों पर सबसिडी बंद
November 23rd, 2019 | Post by :- | 192 Views

प्रदेश में खाद्य दालों पर सबसिडी जारी रखने का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। थोक में आयात की गई दालों का बफर स्टॉक कम करने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों के लिए प्रति दाल 15 रुपए की सबसिडी जारी की थी। इसके चलते हिमाचल में सस्ती दालों पर केंद्र सरकार सबसिडी प्रदान कर रही थी। बफर स्टॉक की कमी का हवाला देते हुए अब केंद्र ने राज्य सरकार को दिया जा रहा यह अनुदान बंद कर दिया है। इस कारण हिमाचल प्रदेश में सस्ते दामों पर उपलब्ध होने वाली डिपुओं की दालें महंगाई का पर्वत चढ़ रही है। इसी माह से उड़द की दाल की कीमत राज्य सरकार ने 35 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपए कर दी है। इसी तरह मूंग की दाल में 40 रुपए प्रति किलोग्राम से वृद्धि कर इसकी दर 50 रुपए कर दी है। इन कीमतों में और तेजी आने की प्रबल संभावना है। इसका प्रमुख कारण यही है कि केंद्र सरकार ने इन दालों पर प्रति किलोग्राम 15 रुपए की सबसिडी पर रोक लगा दी है। हालांकि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से यह मामला प्रमुखता से उठाते हुए अगले एक वर्ष के लिए यह सबसिडी जारी रखने का आग्रह किया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्रालय ने कहा है कि विदेशों से आयात किया गया दालों का बफर स्टॉक समाप्त हो गया है। इसके चलते सबसिडी जारी रखना संभव नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में डिपुओं की दालें ऊंचाई के शिखर पर पहुंची थी। उस दौरान राजमाह 75 रुपए प्रतिकिलो तथा चना दाल 55 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिकी थी। हिमाचल में जयराम सरकार के गठन के तुरंत बाद दालों के दाम धड़ाम से लुढ़के थे। ओपन मार्किट में दाल की कीमतों में आई कमी के कारण डिपुओं की दालें भी सस्ती हो गई थी। इस कारण जयराम सरकार पिछले पौने दो सालों से सभी दालों को 35 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध करवा रही थी।

ओपन में दाम डबल

अब केंद्रीय अनुदान बंद होने और ओपन मार्केट में दालों के दाम बढ़ने से मुसीबत डबल हो गई है। इस कारण डिपुओं की सस्ती दालें और महंगी हो सकती है। हालांकि राज्य सरकार ने उड़द तथा मूंग की दाल के दामों में वृद्धि कर इसे 50 रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। इसके विपरीत प्रदेश के उपभोक्ताओं को राहत देते हुए दाल-चना की कीमत 35 रुपए से घटाकर 30 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी है।

एपीएल उपभोक्ताओं के लिए आटा भी होगा महंगा

एपीएल उपभोक्ताओं के लिए एक और झटका आटे की कीमतों में लगने वाला है। फ्लोर मिलों की कमीशन बढ़ने से लाखों परिवारों को अगले माह से आटा भी 40 से 50 पैसे प्रति किलोग्राम महंगा मिल सकता है। सरकार ने एनएफएसए उपभोक्ताओं को गंदम के स्थान पर आटे की आपूर्ति शुरू कर दी है। इसका सीधा लाभ फ्लोर मिलों को होगा। इसकी एवज में उन्हें गंदम पिसाई की कमीशन मिलेगी।

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