हिमाचली छात्र पढ़ेंगे दलाईलामा की शिक्षा, छह माह का कोर्स शुरू
October 24th, 2019 | Post by :- | 157 Views

पुरातन भारतीय शिक्षा पद्धति को कॉलेजों और स्कूलों में बतौर सिलेबस शुरू करने के धर्मगुरु दलाईलामा के प्रयास रंग लाना शुरू कर दिए हैं। भारतीय पाठ्यक्रम में पहली बार दलाईलामा की शिक्षाएं शामिल की गई हैं। दलाईलामा के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन के बाद डिग्री कॉलेज धर्मशाला ने प्राच्य भारतीय विद्या केंद्र की स्थापना की है। इस केंद्र में छात्रों को 6 माह का सर्टिफिकेट कोर्स करवाया जाएगा। इसे प्रदेश विश्वविद्यालय ने स्वीकृति दे दी है। पहले बैच में 30 छात्र यह कोर्स करेंगे। प्राचीन भारतीय विद्या और दया-करुणा की शिक्षा से समाहित इस कोर्स को फंडिंग दलाईलामा दफ्तर करेगा। प्राच्य भारतीय विद्या के सर्टिफिकेट कोर्स में विद्यार्थियों को प्राचीन संस्कृति, परंपरा, ज्ञान विज्ञान, योग, धर्म दर्शन आदि का ज्ञान दिया जाएगा। छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स में एडमिशन लेने वाले 30 विद्यार्थी धर्मगुरु दलाईलामा से 25 अक्तूबर को मुख्य बौद्ध मंदिर में मिलेंगे।

दलाईलामा युवाओं से बातचीत करेंगे और उनके प्रश्नों का जवाब देंगे। दलाईलामा दफ्तर के सचिव सेटन ने बताया कि धर्मशाला कॉलेज के प्राच्य भारतीय विद्या केंद्र में सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले विद्यार्थी धर्मगुरु से 25 अक्तूबर वार्तालाप करेंगे। इसे शुरू करने के लिए अथक प्रयास करने वाले धर्मशाला कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सुनील मेहता ने दावा किया कि प्राच्य भारतीय विद्या केंद्र भारत का पहला ऐसा शैक्षणिक केंद्र होगा, जहां पुरातन भारतीय शिक्षा का ज्ञान दलाईलामा के सहयोग से दिया जाएगा।

धर्मशाला कॉलेज के वर्तमान में प्राचार्य ज्योति कुमार ने बताया कि प्राच्य भारतीय विद्या केंद्र की स्थापना हो चुकी है। पढ़ाई शुरू करने से पहले विद्यार्थी धर्मगुरु से भी मिलेंगे। उधर, सुनील मेहता ने बताया कि पिछले साल मई-जून में धर्मगुुरु दलाईलामा ने इस तरह की पढ़ाई शुरू करने के लिए कॉलेज फैकल्टी को कहा था। सिलेबस में क्या होना चाहिए, इसका मार्गदर्शन लेने के लिए फैकल्टी धर्मगुरु से मिली थी। सिलेबस को प्रदेश विश्वविद्यालय ने स्वीकृति दे दी है।

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